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The tradition that began with a bullock cart has become a mass movement, a torch rally will be taken out from the bus stand to Shaheed Chowraha.

The tradition that began with a bullock cart has become a mass movement, a torch rally will be taken out from the bus stand to Shaheed Chowraha.

बैलगाड़ी से शुरू हुई परंपरा बनी जनआंदोलन, बस स्टैंड से शहीद चौराहे तक निकलेगी मशाल रैली

25वें वर्ष में भव्य ‘शहीद क्रांति मशाल यात्रा’ आज, शहर में उमड़ेगा देशभक्ति का सैलाब।

धार। शहीदों के बलिदान को नमन और राष्ट्रभक्ति की अलख जगाने के उद्देश्य से निकाली जाने वाली ‘शहीद क्रांति मशाल यात्रा’ इस बार अपने 25वें वर्ष में ऐतिहासिक और भव्य स्वरूप में आयोजित होगी। वर्षों पहले बैलगाड़ी से शुरू हुई यह पहल अब शहर की सबसे बड़ी जनभागीदारी वाली देशभक्ति यात्रा बन चुकी है।

धार में सोमवार शाम 6 बजे बस स्टैंड से मशाल यात्रा की शुरुआत होगी, जो शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए शहीद चौराहे पर समाप्त होगी। यात्रा के दौरान शहीद परिवारों के परिजन विशेष रूप से शामिल रहेंगे, जिनका 12 स्थानों पर स्वागत और सम्मान किया जाएगा।

आयोजन समिति के संयोजक राजीव यादव ने बताया कि यह आयोजन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे शहर की भावनाओं का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि देश के वीर सपूतों ने अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया, उसी त्याग को याद रखने और नई पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम जगाने के लिए यह यात्रा निरंतर आयोजित की जा रही है।
इस वर्ष आयोजन को और व्यापक बनाने के लिए शहर को 200 मोहल्लों में विभाजित कर बैठकें की गईं, जिनमें करीब 900 कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त न्यायाधीश अनिल वर्मा मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे।

शहीद स्वजनों की रहेगी विशेष उपस्थिति —

यात्रा में शहीदों के वंशज—विशाल नय्यर (सुखदेव जी), प्रशांत राजगुरु (राजगुरु जी) और अशफाक उल्ला खान के परिजन शामिल होंगे, जो आयोजन को विशेष भावनात्मक आयाम देंगे।

यह रहेगा यात्रा मार्ग —

बस स्टैंड से प्रारंभ होकर यात्रा पठ्ठा चौपाटी, नालछा दरवाजा, पौ-चौपाटी, राजबाड़ा, आनंद चोपाटी, जवाहर मार्ग, मोहन टाकीज चौराहा और उदाजीराव चौराहा होते हुए शहीद चौक पहुंचेगी।

दीप प्रज्वलन के साथ होगा समापन —

समापन स्थल पर शहीदों के नाम दीप प्रज्वलित कर श्रद्धांजलि दी जाएगी और आतिशबाजी के साथ आयोजन का समापन होगा। साथ ही शहीद चौराहे की पहचान को स्थायी बनाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

यह आयोजन न केवल शहीदों को श्रद्धांजलि है, बल्कि समाज में देशभक्ति और बलिदान की भावना को सशक्त करने का एक प्रेरक प्रयास भी है।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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