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नवजात शिशु की मौत पर हंगामा, डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ पर लगे गंभीर आरोप

जन्म के कुछ समय बाद स्वस्थ बताए गए नवजात की हुई मौत, परिजनों ने की निष्पक्ष जांच की मांग।

धार। (राकेश साहू) जीला अस्पताल में एक नवजात बालिका की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा करते हुए डॉक्टरों एवं नर्सिंग स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि जन्म के बाद माँ और नवजात दोनों स्वस्थ थे, लेकिन कुछ ही देर बाद अस्पताल स्टाफ द्वारा बच्ची को गंदा पानी पी लेने के कारण उसकी साफ सफाई के लिए अंदर ले गए उसके बाद स्टॉफ द्वारा नवजात बच्ची की मौत की सूचना परिजनों को दी गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार नवासा निवासी शुभम पिता भगवान सिंह ने बताया कि उनकी पत्नी श्रीमती रेखा मंडवाल को आशा सिसोदिया आशा कार्यकर्ता की सहायता से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रात करीब 9 बजे चिकित्सकीय जांच की गई और रात्रि लगभग 12 बजे शुभम की पत्नी ने एक नवजात स्वस्थ बालिका जो 3किलो 700 ग्राम की बताई गई उसको जन्म दिया।

जन्म के बाद स्वस्थ थी बच्ची, फिर अचानक कैसे हुई मौत? 

परिजनों के अनुसार जन्म के बाद माँ और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ थे। बच्ची का वजन लगभग 3 किलो 700 ग्राम था और उसे सामान्य बताया गया था। इसके कुछ समय बाद अस्पताल स्टाफ ने परिजनों को बताया कि बच्ची ने “गंदा पानी पी लिया है”, इसलिए उसे साफ-सफाई के लिए अंदर ले जाना पड़ेगा।

परिजनों का आरोप है कि जब शुभम की माता बच्ची के साथ अंदर जाने लगीं तो नर्सिंग स्टाफ ने उन्हें रोक दिया तथा उनके साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया। इसके बाद कुछ समय पश्चात बच्ची को मृत घोषित कर दिया गया।

परिजनों ने डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ पर लगाए गंभीर आरोप —

शुभम व उनके पिता भगवान सिंह ने डॉ ईश्वर रावत, डॉ राजेंद्र अगलेचा तथा डॉ शर्मीला पाटीदार सहित अस्पताल नर्सिंग स्टाफ पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि नवजात की मौत के मामले को दबाने के लिए उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया गया और पुलिस बुलाने की बात कहकर दबाव बनाया गया। झूठे आरोप लगाकर धमकाया गया कि महिलाओं के वार्ड में गंदी नियत से प्रवेश कर रहे हो, पुलिस भी आई और समझा बुझाकर चली गई।

शुभम का आरोप है कि जिला अस्पताल में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है और इसी कारण एक स्वस्थ नवजात की जान चली गई।

सिविल सर्जन डॉ. एम.के. बर्मन ने दिया अस्पताल प्रशासन का पक्ष —

इस संबंध में जब शुभम व उनके पिता भगवान सिंह ने सिविल सर्जन डॉ. एम.के. बर्मन से मुलाकात की तो उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार नवजात शिशु ने गंदा पानी पी लिया था। नवजात बच्ची के कागजात देखने के बाद पता चला कि बच्ची की श्वास नली में गंदा पानी चला गया था, जिससे सांस लेने में दिक्कत उत्पन्न हुई जिससे नवजात बच्ची की मौत हो गई। सिविल सर्जन डॉ बर्मन ने बताया कि हमारी चिकित्सकीय टीम द्वारा नवजात को बचाने का भरपूर प्रयास किया गया और अस्पताल स्टाफ ने भी भरसक मदद की। हम लोग आपके दुश्मन नहीं हैं, हमारी या डाक्टर की कोई दुश्मनी नहीं है। यदि परिजनों को किसी प्रकार की शंका है तो वे लिखित में शिकायत प्रस्तुत करें, जिसकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।

डॉ. बर्मन ने यह भी कहा कि मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम (पीएम) कराया जा सकता है, लेकिन परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया।

जांच की मांग, कई सवाल अब भी बरकरार —

नवजात की मौत के बाद जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। आखिर जन्म के बाद स्वस्थ बताई गई बच्ची की अचानक मौत कैसे हुई, क्या उपचार में कहीं चूक हुई या यह एक चिकित्सकीय जटिलता थी, इसका स्पष्ट उत्तर जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

फिलहाल मामला गंभीर बना हुआ है और परिजन निष्पक्ष जांच तथा जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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