पंचायत पोर्टल पर कार्य पूर्ण, लेकिन जमीनी हकीकत में जर्जर और अधूरी संरचना; ग्रामीणों ने की तकनीकी व वित्तीय जांच की मांग।
धार। जिले की जनपद पंचायत गंधवानी अंतर्गत ग्राम पंचायत जलोख्या में ग्रामीण विकास कार्यों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यहां सार्वजनिक संस्थानों में शौचालय निर्माण के नाम पर पंचायत पोर्टल में लगभग 5 लाख 99 हजार 583 रुपये खर्च दर्शाकर कार्य को पूर्ण बताया गया है, जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर या तो निर्माण कार्य हुआ ही नहीं है अथवा जो संरचना मौजूद है वह जर्जर, अधूरी और उपयोग के लायक नहीं है। मामले ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी है।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत पोर्टल पर “Construction of Toilets in Public Institutions” (कार्य आईडी-79152728) को पूर्ण कार्य (Completion of Work) के रूप में दर्ज किया गया है और लाखों रुपये की राशि व्यय होना दर्शाया गया है। लेकिन जब ग्रामीणों ने स्थल का निरीक्षण किया तो वहां निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति पोर्टल पर दर्ज जानकारी से मेल नहीं खाती दिखाई दी।
पोर्टल पर विकास, जमीन पर बदहाली —
ग्रामीणों का आरोप है कि जिस सार्वजनिक शौचालय निर्माण पर करीब छह लाख रुपये खर्च होने का दावा किया गया है, उसकी स्थिति देखकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर सरकारी राशि खर्च कहां हुई। यदि निर्माण कार्य पूरा हुआ है तो उसकी गुणवत्ता और उपयोगिता पर प्रश्नचिह्न है, और यदि निर्माण नहीं हुआ तो यह सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है।
तकनीकी और वित्तीय जांच की उठी मांग —
ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए। जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि कार्य वास्तव में कब, किस एजेंसी द्वारा और किस गुणवत्ता मानक के तहत किया गया। साथ ही खर्च की गई राशि का सत्यापन कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल —
इस मामले ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि यदि पोर्टल पर लाखों रुपये के कार्य पूर्ण दर्शाए जा रहे हैं, तो उनकी भौतिक सत्यापन और गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जिला पंचायत धार, जनपद पंचायत गंधवानी तथा संबंधित विभागों से तत्काल हस्तक्षेप कर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।


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