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Home » मध्यप्रदेश » HC स्टे आदेश के बाद भी वन मंडल द्वारा किसानों को बेदखल किया गया
धार। सुनील कटारिया – मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (इंदौर पीठ) के एक आदेश का अंश है। इस आदेश के मुख्य बिंदुओं का संक्षिप्त और सरल विश्लेषण नीचे दिया गया है। जिसमें बताया गया है कि पत्ताधारी किसानों को स्ट दिया गया है एवं वन मंडल द्वारा पत्ताधारी किसानों को वहां से नहीं हटाया जाए यानी की कोर्ट की भाषा में स्टे मिला हुआ था उसके बावजूद किसानों को वहां से हटकर वन मंडल सरदारपुर के द्वारा बाउंड्री वॉल की गई बहुत जमीन की खुदाई कर किसानों को बेदखल किया गया।
मुख्य बिंदु —
  • मामला: अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के तहत याचिकाकर्ताओं की शिकायत से जुड़ा है।
  • स्थिति: सहायक आयुक्त (वन) ने जून 2025 में ही यह शिकायत मुख्य प्रधान वन संरक्षक (प्रतिवादी संख्या 3) को भेज दी थी, लेकिन इस पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
  • चिंता: याचिकाकर्ताओं को डर था कि निर्णय लंबित रहने के दौरान उन्हें जमीन से बेदखल कर दिया जाएगा।

न्यायालय का निर्देश —
  • शिकायत पर निर्णय: न्यायालय ने प्रतिवादी संख्या 3 (मुख्य प्रधान वन संरक्षक) को आदेश दिया है कि वे याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का उचित अवसर दें।
  • समय सीमा: इस आदेश की प्रमाणित प्रति (Certified Copy) मिलने की तारीख से दो महीने के भीतर शिकायत पर निर्णय लेना था।
  • यथास्थिति (Status Quo): जब तक इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक विवादित भूमि पर आज की स्थिति बनी रहेगी (यानी याचिकाकर्ताओं को हटाया नहीं जाएगा)। इसका मतलब यह था कि 2025 में जब किसानों को किसके आर्डर दिया गया जब वह भूमि किसानों के पास संरक्षित थी मतलब किसानों के पास ही रहना थी इसके बावजूद वन मंडल सरदारपुर के द्वारा किसानों को हटकर पोस्ट भूमि पर कब्जा किया गया जो की न्यायोचित नहीं है एवं न्यायालय के आदेश की अवहेलना है।

    संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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