मोहन सरकार के राज मे सरपंच सचिव का बोल बाला।
धार। जहां एक और वित्तीय मामलों में पारदर्शिता के लिए शासन स्तर पर हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं जिम्मेदारों और बिचौलियों की मिलीभगत के सामने सभी प्रयास नाकाम साबित हो रहे हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाएं पंचायतों में अनदेखी एवं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है।
पंचायत दर्पण पर सरपंच सचिव करते हैं फर्जी बिल अपलोड —
पंचायत दर्पण पोर्टल पर अधिकांश पंचायतों के सरपंच-सचिवों ने फर्जी बिल-बाउचर अपलोड कर लाखों रुपए आहरित कर लिए है। पंचायत पोर्टल पर लगाए गए बिलों का सत्यापन करने वाले कोई नहीं है। अगर है भी तो वह उसे नजर अंदाज कर दिया जाता है, हैरानी की बात तो यह कि पंचायतों के द्वारा पोर्टल पर अपलोड किए गए बिल-बाउचर धुंधले लगाए जाते हैं।
गौरतलब है कि एक ऐसा ही मामला जनपद पंचायत तिरला के ग्राम पंचायत सिमलावदा का प्रकाश में आया है। जहां स्टेशनरी, मटेरियल, फोटो कॉपी, प्रिंट ऑउट, मोबाइल रिचार्ज के साथ ही मटेरियल खरीदी के नाम पर फर्जी और धुंधले बिल बाउचर लगाकर शासकीय राशि खुर्द-बुर्द की जा रही है।
धुंघले बिलों की आड़ में हो रहा खेला —
ग्राम पंचायतों में पंचायत दर्पण में अपलोड किए जाने वाले बिलो की धुंधली या ना पढ़े जा सकने वाले बिलो को अपलोड किया जा रहा है, ग्राम पंचायत ऐसे बिलो की आड़ में बड़ा फर्जीवाड़ा, बड़े पैमानें पर कर रही है। पंचायतों में किए गए विकास कार्यों के संबंध में पारदर्शिता के लिए पंचायत दर्पण एप पर कार्यों व बिलों की जानकारी अपलोड किया जाता हैं।
पारदर्शिता के लिए संचालित की गई पंचायत दर्पण ऐप पर किए गए धुंधले बिल अपलोड —
ऐसे में ग्राम पंचायत सिमलावदा में भुगतान किए गए कई बिल धुंधले दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में पता नहीं चल रहा कि उन्होंने कहां से क्या और कितने रुपए का सामान खरीदा है ओर खर्च किया है। इन पंचायतों में निमार्ण कार्यों के लिए लाखों की राशि खर्च की गई। बिलों में पारदर्शिता नहीं होने से पंचायतों में हुए कार्यों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सरकार की बहुउद्देशीय योजनाओं को पलीता लगाते मंत्री सरपंच —
सरकार के द्वारा संचालित की जा रही योजनाओं एवं पारदर्शिता के उद्देश्य से संचालित की जा रही पंचायत दर्पण में अपलोड किए गए ये केवल कुछ बिल बाउचर है। अगर सभी बिलों की पड़ताल की जाए तो लाखों रुपए का घोटाला सामने आ सकता है, धुंधले बिल से यह जाहिर नहीं हो पाता कि बिल सही लगा है या गलत। आखिर ऊपर बैठे जिम्मेदार अधिकारी इसको रोक क्यों नहीं पा रहे है, यह एक बड़ा सवाल है।
नोट:- इस खबर का प्रकाशन पंचायत दर्पण से डाटा लेकर प्रसारित किया गया है।
क्या कहते हैं ? पंचायत के जिम्मेदार —
सिमलावदा पंचायत सचिव नारायण पाटीदार से फोन पर चर्चा करने के लिए उनके नंबर पर फोन लगाया गया, उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा।


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