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The municipality's unique business model: renting out footpaths

The municipality's unique business model: renting out footpaths

नगर पालिका का ‘अनोखा’ बिजनेस मॉडल, किराये पर चल रहा फुटपाथ

विकास पुरुष ने जनता के पैदल चलने को बनाया फुटपाथ, नपा ने उसे ही किराए पर उठा दिया।

धार। शहर की सड़कों को सुंदर बनाने और यातायात को सुगम करने के लिए विकास पुरुष विक्रम वर्मा ने जो ‘आदर्श सड़कें’ और फुटपाथ बनवाए थे, आज नगर पालिका के अधिकारियों ने उसे ही अपनी कमाई का जरिया बना लिया है। जिस फुटपाथ पर जनता के कदम पड़ने चाहिए थे, वहाँ आज कचरा और दुकानों का कब्जा है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह कब्जा अवैध नहीं, बल्कि नपा की ‘सहमति’ से चल रहा है, जिसके बदले रोजाना ₹50 से लेकर ₹5000 महीना तक की ‘वसूली’ की जा रही है।

पैदल चलने वाले सड़क पर, दुकानदार फुटपाथ पर

धार शहर के इंदौर नाके से लेकर देवी जी तक का मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग का हिस्सा है। यहाँ इंदौर-अहमदाबाद की बड़ी बसें और भारी वाहनों का रेला लगा रहता है। नपा की मेहरबानी से फुटपाथ पर दुकानदारों ने आधिपत्य जमा लिया है। जब ग्राहक यहाँ खरीददारी करने आते हैं, तो वे अपनी गाड़ियां बीच सड़क पर खड़ी करते हैं, जिससे ट्रैफिक जाम होना अब यहाँ की नियति बन चुकी है।

50 रुपए रोज से लेकर 5000 रुपए महीने तक का खेल।

सूत्रों की मानें तो नगर पालिका के छोटे से लेकर बड़े कर्मचारी इस ‘उगाही’ के खेल में शामिल हैं।

वसूली दर: ₹50 प्रतिदिन से शुरू होकर ₹2000 प्रतिमाह तक।

अधिकार: पैसा दो और फुटपाथ के साथ-साथ सड़क के एक हिस्से पर भी कब्जा कर लो।

नतीजा: राहगीरों की जान जोखिम में। पूर्व में फुटपाथ पर दुर्घटनाओं के कई प्रत्यक्ष प्रमाण होने के बावजूद प्रशासन कुंभकर्णी नींद में है।

स्कूल के बच्चों की जान आफत में, न सिग्नल न जगह

शहर का सबसे व्यस्त ‘घोड़ा चौपाटी’ क्षेत्र अतिक्रमण की गिरफ्त में है। यहाँ कई बड़े स्कूल संचालित होते हैं। छुट्टी के वक्त जब सैकड़ों बच्चे एक साथ बाहर निकलते हैं, तो अतिक्रमण और भारी ट्रैफिक के कारण यहाँ जानलेवा स्थिति बन जाती है। विडंबना देखिए, इतने महत्वपूर्ण चौराहे पर न तो सिग्नल लाइट है और न ही सुव्यवस्थित यातायात प्रबंधन।

वीआईपी आगमन पर ही जगता है प्रशासन —

जब भी किसी बड़े नेता या वीआईपी का दौरा होता है, तो प्रशासन ‘खानापूर्ति’ के लिए पीला पंजा चलाता है और अतिक्रमण हटाता है। लेकिन जैसे ही वीआईपी की गाड़ी शहर की सीमा लांघती है, फुटपाथ पर फिर से दुकानें सज जाती हैं।

मध्यभारत लाइव सवाल:

  1. क्या चंद रुपयों के लालच में नगर पालिका जनता की जान से समझौता कर रही है?
  2. विकास पुरुष के ‘आदर्श सड़क’ के सपने को नपा के भ्रष्ट तंत्र ने क्यों रौंदा?

नेशनल हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं का जिम्मेदार कौन—कब्जा करने वाले या वसूली करने वाले?

अब देखना यह है कि धार प्रशासन इस ‘किराए के खेल’ को बंद कर फुटपाथ आम जनता को वापस दिलाता है या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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