जबलपुर क्रूज हादसा: मां के सीने से चिपका हुआ 4 वर्षीय बेटे का शव, दोनों को देख भर आईं सबकी आंखें।
जबलपुर। मध्य प्रदेश के बरगी बांध के पास नर्मदा नदी में गुरुवार शाम हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है। तेज आंधी और खराब मौसम के बीच पर्यटकों से भरी नाव पलट गई, जिसमें अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है। कई अभी लापता हैं, जिनकी समय के साथ बचने की उम्मीद कम होती जा रही है।
मृतकों में एक मां और उसका चार वर्षीय बेटा भी शामिल हैं, जिनके शव शुक्रवार सुबह मिले। मां अपने बच्चे को सीने से चिपकाए हुए थी। मानो आखिरी पल तक उसे बचाने की कोशिश कर रही हो।
शव दिल्ली निवासी मरीना मसीह व उनके चार वर्षीय बेटे प्रशांत का है। मरीना के पति जूलियस मसीह रक्षा मंत्रालय दिल्ली में हैं। जबलपुर में आयुध निर्माणी जबलपुर में शासकीय कामकाज से आए थे। परिवार सहित बरगी बांध घूमने गए थे। मरीना 39 वर्ष व करीब 4 साल के बेटे प्रशांत की बॉडी रिकवर हुई है। पति प्रदीप और बेटी सिया सहित अन्य स्वजन सुरक्षित है।
अचानक बदला मौसम
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के वक्त मौसम अचानक खराब हो गया। तेज हवाओं और ऊंची लहरों के कारण क्रूज का संतुलन बिगड़ गया। कुछ ही पलों में नाव में पानी भरने लगा और अफरा-तफरी मच गई। यात्रियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
परिवार बिछड़ा, कई अब भी लापता
यह परिवार दिल्ली से घूमने आया था। हादसे में पिता और बेटी किसी तरह बच निकले, जबकि मां और बेटा काल के गाल में समा गए। वहीं, एक अन्य यात्री सैयद रियाज हुसैन ने बताया कि उनकी पत्नी, समधन और नाती पलक झपकते ही आंखों से ओझल हो गए और अब तक लापता हैं।
‘चमत्कार’ से बची जान
रियाज हुसैन ने बताया कि वह खुद भी डूबने लगे थे, लेकिन एक जगह फंस जाने से उनका सिर पानी के ऊपर रहा और वे करीब दो घंटे तक उसी हालत में जिंदा रहे। उन्होंने कहा कि चारों ओर शव तैर रहे थे, लेकिन बचाव दल की नजर पड़ने से उनकी जान बच गई।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
अधिकारियों के अनुसार, अब तक 24 लोगों को बचाया गया है, जिनमें 17 अस्पताल में भर्ती हैं। नौ लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं, जिनमें पांच बच्चे भी शामिल हैं। पुलिस, प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।
कैप्टन बचा, जांच शुरू
क्रूज के कैप्टन महेश पटेल लाइफ जैकेट पहनने के कारण बच गए। हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है, जिसमें मौसम पूर्वानुमान और सुरक्षा मानकों की अनदेखी जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है।

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