धार। जिले की ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं की कई गंभीर खबरें हाल ही में सामने आई हैं। ग्रामीण विकास, मनरेगा (MGNREGA), और निर्माण कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये के घपले के आरोप सरपंच, प्रधान और सचिवों पर लग रहे हैं।
- कागजी निर्माण: सड़कें, नालियां और तालाब सिर्फ फाइलों और कागजों पर बना दिए जाते हैं, जबकि धरातल पर कुछ नहीं होता। वहीँ पंचायत दर्पण पोर्टल पर फर्जी और धुंदले बिल अपलोड किए जाते है ताकि भ्रस्टाचार को छुपाया जा सके।
- फर्जी जॉब कार्ड (मनरेगा): मनरेगा के तहत फर्जी नाम या कार्ड बनाकर सरकारी पैसों का भुगतान कर दिया जाता है। जिसे भुगतान प्राप्त होता है कमीशन पर आधा पैसा वापस ले लिया जाता है या फिर फर्जी अकाउंट खोल कर राशि का आहरण किया जाता है।
- मशीनों का अवैध उपयोग: मनरेगा कार्यों में स्थानीय मजदूरों के बजाय गुपचुप तरीके से मशीनों (जैसे JCB) से काम करवाकर मजदूरों का पैसा हड़प लिया जाता है।
- कट मनी और रिश्वत: सरकारी योजनाओं (जैसे जल जीवन मिशन या आवास योजना) का लाभ दिलाने के नाम पर लाभार्थियों से कमीशन या रिश्वत की मांग की जाती है।
- नानंदखेड़ा में निर्माण कार्यों पर सवाल: जून 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, नानंदखेड़ा ग्राम पंचायत में आंगनवाड़ी भवन निर्माण सहित कई अन्य बुनियादी कार्यों में भारी वित्तीय गड़बड़ी के आरोप ग्रामीणों द्वारा लगाए गए हैं। सोशल मीडिया पर इससे जुड़े विवाद और शिकायतें पोस्ट होने के बाद स्थानीय स्तर पर इसकी ठोस जांच की मांग तेज हो गई है।

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