धार। शराब व्यापारियों की गाड़ी के कई एक्सीडेंट। क्या पुलिस ने स्पष्ट रूप से शराब व्यावसाइयों को बोल रखा है कि जब भी कोई गाड़ी रोकने आए उसे ठोक दो या मार दो ?
एक वर्ष पहले भी एक अवैध शराब परिवहन करते हुए वाहन के द्वारा एक आदिवासी व्यक्ति की मौत हो गई थी। उसके बाद जब आदिवासी संगठन और समाज जन सड़क पर उतरे थे उसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उक्त व्यक्ति को अरावली शराब का व्यापार करने वाला बताकर प्रकरण को दबा दिया था
अभी जब से जिले में नए शराब ठेके प्रारंभ हुए हैं तब से शराब व्यापारियों के हौसले बुलंद हैं। यह लोग ना पुलिस से डरते हैं ना आबकारी विभाग से खुलेआम नियमों को ताक पर रखकर अपना काम चला रहे हैं।
आपकारी नीति के अनुसार प्रत्येक शराब दुकान पर शराब की रेट लिस्ट चश्पा होनी चाहिए इतना ही नहीं वस्तु अधिनियम के अंतर्गत शराब की बोतल पर अंकित एमआरपी से अधिक मूल्य में शराब बेची जाना अपराध की श्रेणी में आता है। बावजूद इसके पुलिस क्यों नहीं कर पा रही है कार्रवाई। क्या शराब विक्रेताओं के हाथ की कठपुतली बनी पुलिस और आबकारी।

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