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Imambara to be closed in July, police force to be deployed in large numbers

Imambara to be closed in July, police force to be deployed in large numbers

जुलाई में बंद किया जाएगा इमामबाड़ा, बड़ी संख्या में पुलिसबल रहेगा तैनात

धार। शहर में स्थित सरकारी इमामबाड़े में ताजिया निर्माण को लेकर चल रहे विवाद में न्यायालय की इंदौर पीठ ने सुनवाई के दौरान नया मोड़ ला दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता मुस्लिम पक्ष को बड़ी राहत दी गई।

मुस्लिम समुदाय के सबसे बड़े त्यौहार मोहर्रम के चलते सरकारी इमामबाड़े की चाबियां सौंपने का आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट के जस्टिस सुबोध अभयंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह अंतरिम राहत प्रदान की है।

आपको बता दें कि आदेश का सही से पालन सुनिश्चित कराने के लिए कोर्ट ने पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने के निर्देश भी दिए हैं। नए आदेश आने के बाद पुलिस की चिंता बढ़ा दी गई हैं, नगर में लगातार पुलिस के वाहन पेट्रोलिंग कर रहे है। इधर आदेश पक्ष में आने की जानकारी मिलते ही बडी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग भी क्षेत्र में एकत्रित हो रहे हैं, कुछ युवाओं ने क्षेत्र में पटाखे फोड़ कर आतिशबाजी भी की है।

इमामबाड़े में पारंपरिक रूप से तजिया निर्माण की अनुमति को लेकर दो अलग-अलग रिट याचिकाएं (डब्लूमपी-नंबर. 37514/2025 और डब्लूकपी- नंबर 15440/2026) कोर्ट में लंबित हैं। जिला प्रशासन ने पूर्व में इस आधार पर अनुमति देने से इनकार कर दिया था कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर पाए थे कि वे आधिकारिक तौर पर ‘सरकारी तजिया समिति’ के सदस्य या पदाधिकारी हैं। इसके अलावा, प्रशासन की ओर से छोटा इमामबाड़ा और जमात खाना में तजिया निर्माण के लिए एक वैकल्पिक जगह भी सुझाई गई थी। प्रशासन का तर्क था कि इस संपत्ति को लेकर दीवानी मुकदमा पहले ही तय हो चुका है और मध्य प्रदेश लोक परिसर बेदखली अधिनियम, 1974 के तहत बेदखली के आदेश जारी किए जा चुके हैं।

त्यौहार को देखते हुए लिया गया निर्णय —

याचिकाकर्ता सिद्दीकी और अन्य की ओर से पेश हुए वकील ने कोर्ट के समक्ष एसडीओ कार्यालय और प्रशासन के ही कुछ पुराने नोटिस और दस्तावेज पेश किए, जिनमें याचिकाकर्ताओं को ‘सरकारी तजिया समिति’ का ‘सदर’ (अध्यक्ष) और पूर्व उपाध्यक्ष संबोधित किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि उन्हें मोहर्रम के त्योहार को संपन्न करने के लिए केवल सिर्फ कुछ दिनों के लिए ही अस्थायी कब्जा चाहिए, जिसके बाद वे संपत्ति को सुरक्षित प्रशासन को सौंप देंगे। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि चूंकि मुख्य मामले में पक्षों के कानूनी अधिकारों का पूरी तरह तय होना अभी बाकी है, और पिछले साल भी यथास्थिति के तहत यहाँ तजिया निर्माण हुआ था, इसलिए त्योहार की संवेदनशीलता को देखते हुए मुस्लिम समुदाय को 5 दिनों के लिए समायोजित करने से राज्य को कोई नुकसान नहीं होगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया जब तक विवादित संपत्ति याचिकाकर्ताओं के कब्जे में रहेगी, याचिकाकर्ताओं द्वारा निर्माण के माध्यम से कोई बदलाव या उसका कोई हिस्सा हटाया नहीं जाएगा और संपत्ति साफ-सुथरी स्थिति में राज्य को सौंपी जाएगी।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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