धार। मध्य भारत लाइव न्यूज़ की खबर का असर आखिरकार जिला पुलिस कप्तान को खबरों के प्रकाशन के बाद पुलिस पर हमले के मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। भारी मात्रा में पुलिस बल की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को अंजाम दिया गया। हालांकि इस पूरे मामले में जीस मकान के अतिक्रमण हटाने में पुलिस पर हमला किया गया था जिसमें एक थाना प्रभारी सहित महिला पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं, वहीं करीब 10 से 12 पुलिस कर्मचारी अधिकारी भी घायल होने की सूचना प्राप्त हुई थी। इन सब के बावजूद प्रशासनिक दस्तावेजों में बताए गए अतिक्रमणकारि संतोष नेवा की गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई, उसे आरोपी क्यों नहीं बनाया गया। क्या पुलिस पर हमला करना आम बात है ? लगातार पुलिस पर हमला होना पुलिस के द्वारा सुस्त एवं लचर रवैये को दर्शाता है।
इस प्रकार के हमलावरों पर अगर पुलिस प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं करता है तो इन लोगों को आने वाले समय में बल मिलेगा और यह लोग जब भी कहीं पुलिस या प्रशासन कोई कार्रवाई करने जाएंगे तब भिड़ एकत्रित करके पुलिस के ऊपर हमला करेंगे। इन लोगों को सबक सिखाने के लिए पुलिस द्वारा कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाना चाहिए एक थाना प्रभारी के ऊपर जानलेवा हमला करने के साथ-साथ शासकीय कार्य में बाधा सहित गंभीर धाराओं में अपराध पंजीबद्ध कर इन्हें जेल की शलाखों के पीछे भेजना चाहिए, ताकि आने वाले भविष्य में पुलिस प्रशासन के सामने कोई भी व्यक्ति इस प्रकार की उद्दंडता करने की हिमाकत न कर सके।

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