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Home » मध्यप्रदेश » जहरीली शराब कांड, आबकारी विभाग की अनदेखी और गंभीर लापरवाही का आलम मौत

सागर। जिले की बंडा तहसील के बराज, घूघर, नौराज समेत आसपास के गांवों में लोगों द्वारा कथित तौर पर जहरीली/नकली शराब का सेवन किया गया था। शराब पीने के बाद कई लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। अचानक उल्टी, चक्कर, कमजोरी, हाथ-पैर अकड़ना और गंभीर स्थिति जैसे लक्षण सामने आए। शुरुआत में कई मरीजों को स्थानीय अस्पतालों में ले जाया गया, जिसके बाद गंभीर मरीजों को सागर के बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया।

मौतों का आंकड़ा कितना?

7 सितंबर की सुबह तक कम से कम दो दर्जन मौतों की पुष्टि वाली रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि कुछ स्थानीय/अन्य मीडिया रिपोर्टों में इससे अधिक मौतों के दावे भी किए गए हैं। इसलिए आधिकारिक अंतिम आंकड़ा जांच और पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट माना जाएगा।

अस्पतालों में कितने मरीज?

मरीजों की संख्या भी लगातार बदल रही है। कुछ रिपोर्टों में 35 के आसपास, जबकि अन्य रिपोर्टों में 100 से अधिक लोगों के अस्पताल पहुंचने/भर्ती होने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन द्वारा गांवों में स्क्रीनिंग और घर-घर स्वास्थ्य जांच भी कराई जा रही है।

शराब में क्या मिलाया हुआ मिला?

जांच का सबसे गंभीर खुलासा मेथेनॉल (Methyl Alcohol) को लेकर है। पोस्टमार्टम और जांच से जुड़ी रिपोर्टों में मृतकों के शरीर में मिथाइल अल्कोहल/मेथेनॉल की मौजूदगी बताई गई है। मेथेनॉल अत्यंत जहरीला होता है और अधिक मात्रा में सेवन जानलेवा हो सकता है।

शराब कहां से आई?

जांच एजेंसियां शराब की सप्लाई चेन को उत्तर प्रदेश के ललितपुर से जोड़कर देख रही हैं। शुरुआती जांच में सस्ती नकली शराब के अंतरराज्यीय नेटवर्क की आशंका सामने आई है। हालांकि पूरे नेटवर्क और वास्तविक स्रोत की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

इतनी सस्ती शराब क्यों?

एक रिपोर्ट के अनुसार जहरीली शराब में मेथेनॉल मिलाकर लागत कम और मुनाफा ज्यादा करने की आशंका है। बंडा क्षेत्र में एक ढाबे पर लाइसेंसी ठेके से लगभग 20–30 रुपये कम कीमत में शराब मिलने की बात भी सामने आई है। यह जानकारी जांच के दायरे में है।

बड़ी कार्रवाई 

मामले में पुलिस ने बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू की है। 30 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किए जाने और 14 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी 7 सितंबर की रिपोर्ट में सामने आई है। पुलिस कथित सप्लाई नेटवर्क और शराब उपलब्ध कराने वालों की कड़ियां जोड़ रही है।

अधिकारियों पर भी गिरी गाज

घटना के बाद सरकार ने आबकारी विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई की। रिपोर्टों के मुताबिक कई आबकारी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर निलंबन की कार्रवाई की गई है। इससे यह सवाल भी उठा है कि क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री पर निगरानी क्यों नहीं हो सकी।

सबसे बड़े सवाल ?

  1. मेथेनॉल मिली शराब बंडा क्षेत्र तक कैसे पहुंची?
  2. क्या स्थानीय स्तर पर लंबे समय से अवैध शराब का नेटवर्क सक्रिय था?
  3. ललितपुर से सागर तक सप्लाई चेन में कौन-कौन शामिल है?
  4. सस्ती शराब की बिक्री की जानकारी प्रशासन को पहले से थी या नहीं?
  5. निगरानी और आबकारी तंत्र ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?
  6. लाइसेंसी शराब और नकली शराब की पहचान में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई?

एक मीडिया रिपोर्ट में यह भी सवाल उठाया गया है कि क्षेत्र में अवैध शराब के खतरे को लेकर पहले चेतावनियां/जानकारियां होने के बावजूद प्रभावी फील्ड कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

महत्वपूर्ण सावधानी

इस मामले में मौतों, अस्पताल में भर्ती मरीजों और आरोपियों की संख्या तेजी से अपडेट हो रही है और मीडिया रिपोर्टों में अंतर है। इसलिए प्रकाशन के लिए सबसे सुरक्षित भाषा होगी—“प्रारंभिक/उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार” और आधिकारिक आंकड़े आने पर उसे अपडेट किया जाएगा।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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