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Record voting in Bengal, will the Left's stronghold end in Kerala?

फ़ाइल फोटो

बंगाल में रिकॉर्ड वोटिंग, क्या केरल में खत्म होगा वामपंथ का किला?

नई दिल्ली। देश के पांच राज्यों—पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी—में आज ‘फैसले की घड़ी’ है। सुबह 8 बजे से डाक मतपत्रों (पोस्टल बैलेट) की गिनती के साथ ही ईवीएम के पिटारे खुलने शुरू हो गए हैं। इन नतीजों से न केवल इन राज्यों की सत्ता तय होगी, बल्कि देश की राजनीति की कई बड़ी तस्वीरें भी साफ हो जाएंगी।

हाईटेक सुरक्षा: क्यूआर कोड वाली ‘नो एंट्री’

निर्वाचन आयोग ने इस बार सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए हैं। पहली बार ECINET के तहत क्यूआर कोड आधारित फोटो पहचान प्रणाली लागू की गई है। यानी बिना स्कैनिंग के परिंदा भी मतगणना केंद्र के भीतर पर नहीं मार पाएगा। हर केंद्र पर थ्री-लेयर सिक्योरिटी तैनात है।

राज्यवार समीकरण: कहां, क्या हैं दांव पर?

1. पश्चिम बंगाल: ‘दीदी’ बनाम ‘दादा’ का दंगल

  • सीटें: 293 (77 मतगणना केंद्र)
  • वोटिंग: रिकॉर्ड 92.47% (अब तक की सबसे अधिक)
  • खास बात: फलता सीट पर मतदान रद्द होने के कारण अब 21 मई को वोट डाले जाएंगे। बंगाल में इस बार मुकाबला बेहद कड़ा है, जहां टीएमसी अपनी सत्ता बचाने और भाजपा सेंध लगाने की पूरी कोशिश में है।

2. केरल: 60 साल का इतिहास बदलेगा?

  • सीटें: 140 (883 उम्मीदवार)
  • मुकाबला: यूडीएफ बनाम एलडीएफ
  • बड़ी बात: अगर वामपंथी गठबंधन (एलडीएफ) हारता है, तो 1960 के दशक के बाद यह पहली बार होगा जब किसी राज्य से वाम दल सत्ता से बाहर होंगे।

3. असम: किलेबंदी तगड़ी, सुरक्षा कड़ी

  • सीटें: 126 (722 उम्मीदवार)
  • सुरक्षा: 25 कंपनियां केंद्रीय सुरक्षा बल की तैनात।
  • पिछला हाल: यहां 9 अप्रैल को 85.96% मतदान हुआ था, जो सत्ता की चाबी किसके पास जाएगी, इसका संकेत देगा।

4. तमिलनाडु: द्रमुक की साख और विजय की एंट्री

  • सीटें: 234 (सोमवार को भी जारी रहेगी काउंटिंग)
  • नया फैक्टर: इस बार पारंपरिक द्रविड़ राजनीति के बीच अभिनेता विजय की पार्टी ‘टीवीके’ और सीमान की ‘एनटीके’ भी मैदान में हैं। 4,600 से ज्यादा माइक्रो-ऑब्जर्वर हर टेबल पर नजर रख रहे हैं।

5. पुडुचेरी: छोटा राज्य, बड़ा मुकाबला

  • सीटें: 30
  • इंतजाम: छह मतगणना केंद्रों पर वोटों की गिनती जारी है।

आज के नतीजे केवल जीत-हार का आंकड़ा नहीं हैं, बल्कि यह क्षेत्रीय दलों की ताकत और राष्ट्रीय पार्टियों के विस्तार का लिटमस टेस्ट है। बंगाल की रिकॉर्ड वोटिंग क्या सत्ता परिवर्तन का संकेत है या सत्ता के प्रति विश्वास का? दोपहर तक तस्वीर साफ होने लगेगी।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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