madhyabharatlive

Sach Ke Sath

Home » मध्यप्रदेश » मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए मंत्री ने मांगे सरपंच से 200 रुपए
The minister demanded Rs 200 from the sarpanch for the death certificate.

The minister demanded Rs 200 from the sarpanch for the death certificate.

मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए मंत्री ने मांगे सरपंच से 200 रुपए

जब ‘सरपंच’ को ही मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए देनी पड़ी रिश्वत, PhonePe बना भ्रष्टाचार का पक्का सबूत।

धार। यह खबर प्रशासनिक तंत्र के मुंह पर एक करारा तमाचा है। जरा सोचिए, जिस देश में व्यवस्था के शीर्ष पर बैठे जनप्रतिनिधि (सरपंच) ही सुरक्षित नहीं हैं, वहां आम जनता की बेबसी का क्या आलम होगा? मध्य प्रदेश के धार जिले से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक सरपंच को अपनी जेब ढीली करनी पड़ गई। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए?
क्या है पूरा मामला —
मामला पंचायत स्तर पर फैले भ्रष्टाचार के मकड़जाल का है। आरोप है कि पंचायत सचिव (मंत्री) ने नियमों को ताक पर रखकर, खुद सरपंच से ही मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के एवज में 200 रुपए की रिश्वत वसूल ली। हद तो तब हो गई जब यह लेन-देन किसी गुपचुप तरीके से नहीं, बल्कि सरेआम डिजिटल माध्यम (PhonePe) के जरिए किया गया।
सोचने वाली बात: जब ‘प्रधान जी’ को ही अपने हक के लिए घूस देनी पड़ रही हो, तो वहां के आम नागरिकों की लाचारी का अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं। यह प्रशासनिक तंत्र की विफलता का सबसे जीता-जागता और डरावना उदाहरण है।
कानून की किताब क्या कहती है? जानिए अपने अधिकार —
इस पूरे खेल में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं।
कानूनी और प्रशासनिक तथ्य इस प्रकार हैं:
पूरी तरह निःशुल्क सेवा: सरकारी नियमानुसार, किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के 21 दिनों के भीतर मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करने पर यह सेवा पूरी तरह फ्री होती है।
अवैध वसूली है अपराध: इसके लिए किसी भी प्रकार की राशि (चाहे वह मात्र 200 रुपए ही क्यों न हो) मांगना पूरी तरह गैर-कानूनी है और सीधे तौर पर रिश्वत की श्रेणी में आता है।
पद का खुल्लम-खुल्ला दुरुपयोग: एक पंचायत सचिव द्वारा अपने ही सरपंच से पैसे ऐंठना सरकारी नियमों, मर्यादा और सेवा शर्तों का खुला उल्लंघन है।
डिजिटल सबूत फंसाएगा ‘घूसखोर’ मंत्री को !
भ्रष्टाचार करने वाले शायद यह भूल गए कि डिजिटल इंडिया के इस दौर में चालाकी भारी पड़ सकती है। PhonePe से लिया गया पैसा अब इस भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा और पुख्ता सबूत बन चुका है। इस डिजिटल ट्रांजैक्शन के रिकॉर्ड को कभी मिटाया नहीं जा सकता और यही स्क्रीनशॉट आरोपी को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए काफी है।
ऐसे सिखाया जा सकता है सबक:
इस मामले में आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई के लिए ये मुख्य उपाय किए जा सकते हैं:
उच्चाधिकारियों को लिखित शिकायत: सरपंच या पीड़ित व्यक्ति इस पूरे मामले की लिखित शिकायत खंड विकास अधिकारी (BDO) या जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) से कर सकते हैं।
एंटी-करप्शन ब्यूरो की एंट्री: हर राज्य में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) या सतर्कता विभाग (Vigilance) की हेल्पलाइन होती है। डिजिटल ट्रांजैक्शन के स्क्रीनशॉट को बतौर सबूत पेश कर अधिकारी को सस्पेंड कराया जा सकता है।
सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline): राज्य सरकार के शिकायत पोर्टल पर इस डिजिटल लेनदेन के प्रमाण के साथ शिकायत दर्ज कराई जा सकती है, जहां सीधे भोपाल से मॉनिटरिंग होती है।

डिजिटल माध्यम (PhonePe) से लिया गया पैसा भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा प्रमाणित सबूत बनता है, क्योंकि इसके ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड को मिटाया नहीं जा सकता।
हमारी और भी खबरे (समाचार) देखने के लिए हमारे इंस्टाग्राम को फॉलो करे —

I’m on Instagram as @madhyabharat_live. Install the app to follow my photos and videos. https://www.instagram.com/madhyabharat_live?igsh=eHZseXoxeHdjdWg3&utm_source=ig_contact_invite

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

error: MADHYABHARAT LIVE Content is protected !!