धार में पंचायत निर्माण कार्यों पर उठे सवाल: नानंदखेड़ा आंगनवाड़ी भवन निर्माण में लाखों की अनियमितता का आरोप, पत्रकार को धमकाने का भी मामला।
धार। जिले में पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में जनपद पंचायत स्तर पर हुए प्रशासनिक फेरबदल और मुख्य कार्यपालन अधिकारियों के तबादलों के बाद अब ग्राम पंचायतों के कार्यों की भी जांच की मांग तेज हो गई है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जनपद पंचायत तिरला एवं धार के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (सीईओ) के नाम विभिन्न मामले सामने आने के बाद उनका ताबड़तोड़ तबादला किया गया था। इन पर फायर सेफ्टी सहित विभिन्न मदों की राशि के भुगतान में कथित रूप से 10 प्रतिशत कमीशन लेने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
इसी क्रम में अब जनपद पंचायत तिरला अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत नानंदखेड़ा के आंगनवाड़ी भवन निर्माण कार्य पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि निर्माण कार्य में मजदूरी भुगतान के नाम पर बड़ी वित्तीय अनियमितता की गई।
मजदूरी भुगतान में गड़बड़ी के आरोप —
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, आंगनवाड़ी भवन निर्माण कार्य में एक बिल के तहत 210 मजदूरों को 500 रुपये प्रति मजदूर के हिसाब से भुगतान दर्शाया गया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या वास्तव में एक साथ 210 मजदूर कार्यस्थल पर लगाए गए थे? इस मद में लगभग 1.50 लाख रुपये की राशि दर्शाई गई है, जिसकी जांच की मांग की जा रही है।
इसके अलावा एक अन्य बिल में 80 मजदूरों के नाम पर 40 हजार रुपये से अधिक का भुगतान दर्शाया गया है। स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और संबंधित अभिलेखों की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।
शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाने का आरोप —
मामले को उजागर करने वाले पत्रकार ने आरोप लगाया है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद उन्हें विभिन्न माध्यमों से शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। आरोपों के अनुसार पहले विज्ञापन का लालच देकर शिकायत बंद कराने का प्रयास किया गया, फिर कथित रूप से रिश्तेदारी का हवाला देकर समझौते का दबाव बनाया गया।
पत्रकार का कहना है कि जब शिकायत वापस नहीं ली गई, तब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर उनके खिलाफ कथित रूप से भ्रामक और निराधार पोस्ट प्रसारित की गईं।
सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद —
बताया जा रहा है कि एक फेसबुक पोस्ट में मध्य भारत लाइव न्यूज़ का नाम लेते हुए यह आरोप लगाया गया कि संस्था द्वारा शिकायतों को धनराशि लेकर बंद कर दिया जाता है। इस आरोप को पत्रकार एवं मध्य भारत लाइव न्यूज़ के संपादक कमल गिरी गोस्वामी ने पूरी तरह निराधार बताया है।
संपादक का दावा है कि न तो उन्होंने किसी प्रकार की राशि ली है और न ही किसी शिकायत का निपटारा करवाया है। मामले को गंभीर मानते हुए उन्होंने 8 जून को संबंधित पंचायत की शिकायत दर्ज कराई है।
निष्पक्ष जांच की मांग —
स्थानीय नागरिकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि निर्माण कार्यों में मजदूरी भुगतान एवं अन्य मदों में अनियमितता हुई है तो पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही पत्रकारों पर दबाव बनाने और सोशल मीडिया के माध्यम से छवि धूमिल करने के आरोपों की भी जांच की जानी चाहिए, ताकि सही तथ्य सामने आ सकें।

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