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पुलिस की जवाबदेही पर सवाल: ग्रामीण अंचलों में बिना किसी रोक-टोक के उपलब्ध हो रही शराब

धार। मध्य प्रदेश में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों और जमीन पर शराब की अवैध बिक्री (कालाबाजारी) को लेकर चिंता पूरी तरह से प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्था की एक बड़ी चुनौती को रेखांकित करती है। पुलिस की कार्यप्रणाली, अभियानों की जमीनी हकीकत और ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की आसान उपलब्धता पर सवालिया निशान लगता हैं।
इस विषय पर विभिन्न दृष्टिकोण और प्रशासनिक पहलू इस प्रकार हैं: नीतियों और अभियानों का उद्देश्य —
  • जागरूकता बढ़ाना: सरकार और पुलिस प्रशासन का मानना है कि ‘नशे से दूरी है जरूरी’ जैसे अभियानों का उद्देश्य समाज में, विशेषकर युवाओं और स्कूली बच्चों में, नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता पैदा करना है।
  • मानसिकता में बदलाव: सरकारी नीतियों के अनुसार, केवल कानूनी सख्ती से नशा पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता; इसके लिए लोगों की मानसिकता और आदतों में बदलाव लाना भी जरूरी माना जाता है।

जमीनी चुनौतियाँ और अवैध बिक्री पर चिंताएँ —
अवैध आपूर्ति पर रोक की मांग: जैसा की उल्लेख किया, समाज के एक बड़े वर्ग और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि जब तक होटलों, ढाबों और ग्रामीण क्षेत्रों की किराना दुकानों पर अवैध शराब की सप्लाई चेन को पूरी तरह से ध्वस्त नहीं किया जाता, तब तक केवल स्लोगन या जागरूकता अभियान प्रभावी साबित नहीं हो सकते।
प्रशासनिक जवाबदेही: ग्रामीण अंचलों में बिना किसी रोक-टोक के शराब उपलब्ध होने की स्थिति में स्थानीय स्तर पर पुलिस और आबकारी (Excise) विभाग की जवाबदेही पर अक्सर सवाल उठते हैं। जनता की यह मांग पूरी तरह स्वाभाविक है कि पुलिस को केवल प्रचार-प्रसार के बजाय अवैध परिवहन और बिक्री करने वाले शराब माफियाओं पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।
समाधान और आगे की राह कैसे होगी आसान —
कड़ी कानूनी कार्रवाई: मैदानी स्तर पर बदलाव लाने के लिए पुलिस और आबकारी विभाग द्वारा अवैध अड्डों पर नियमित छापेमारी और शराब की अवैध ढुलाई करने वाले वाहनों को जब्त करना आवश्यक कदम माना जाता है।
जनता की भागीदारी और शिकायत तंत्र: अवैध शराब की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के लिए प्रशासन अक्सर गुप्त सूचना तंत्र को मजबूत करने और नागरिकों से शिकायत दर्ज कराने की अपील करता है, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके।
नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए जागरूकता अभियानों (स्लोगन और शिक्षा) के साथ-साथ जमीनी स्तर पर सख्त पुलिसिया कार्रवाई और कानून का कड़ाई से पालन दोनों ही समान रूप से अत्यंत आवश्यक हैं।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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