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Home » मध्यप्रदेश » विकास के खोखले दावों की पोल खोलती जमीनी हकीकत, ग्रामीणों का फूटा आक्रोश,

बाघ गुफाओं के पास बदहाल ज़िंदगी: आज़ादी के 7 दशक बाद भी सड़क और बुनियादी सुविधाओं से महरूम ग्रामीण।

कुक्षी/धार। (लक्की जाजू बाघ)। एक तरफ जहां विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी प्राचीन चट्टानी वास्तुकला और बौद्ध संस्कृति के लिए अमूल्य पहचान रखने वाली ऐतिहासिक बाघ गुफाएं देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करती हैं, वहीं इसके ठीक समीप रहने वाले ग्रामीण आज भी नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। अति प्राचीन बाघेश्वरी मंदिर से लेकर बौद्ध गुफाओं तक फैली ग्रामीण आबादी वाले इस क्षेत्र में आज़ादी के इतने साल बाद भी पक्की सड़क जैसी मूलभूत सुविधा तक नसीब नहीं हुई है।
यह विडंबना ही है कि जो क्षेत्र वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान रखता है, वहां के स्थानीय बाशिंदे विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर हैं।

विकास के खोखले दावों की पोल खोलती ज़मीनी हकीकत—

  • सड़क का अभाव और कीचड़ का साम्राज्य: बाघेश्वरी मंदिर से बौद्ध गुफाओं के मुख्य मार्ग और ग्रामीण बस्तियों तक जाने के लिए आज भी कोई पक्की सड़क नहीं है। बारिश के दिनों में यह पूरा इलाका कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो जाता है। इस दौरान ग्रामीणों का पैदल चलना भी दूभर हो जाता है।
  • बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसते लोग: विश्व स्तर पर ख्याति प्राप्त इस धरोहर के नजदीक रहने वाले लोग न केवल पक्की सड़क, बल्कि स्वास्थ्य, शुद्ध पेयजल और बिजली जैसी प्राथमिक और अनिवार्य सुविधाओं के लिए भी रोज़ाना कड़ा संघर्ष कर रहे हैं।
  • खाट के सहारे स्वास्थ्य व्यवस्था (आपातकाल की मुश्किलें): क्षेत्र में सड़क न होने के कारण यदि कोई ग्रामीण अचानक बीमार पड़ जाता है या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना हो, तो एम्बुलेंस का गांव तक पहुंचना असंभव हो जाता है। ऐसे में मरीजों को खाट (चारपाई) पर लादकर कई किलोमीटर दूर मुख्य मार्ग तक लाना ग्रामीणों की मजबूरी बन चुका है।
  • वैश्विक पर्यटन और देश की छवि पर दाग: देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और शोधकर्ताओं को भी इस ऐतिहासिक क्षेत्र तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अव्यवस्थाओं के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्र और पर्यटन विभाग की छवि पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का आक्रोश—

स्थानीय ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरणप्रेमियों में शासन-प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि यूनेस्को और पर्यटन विभाग के नक्शे पर चमकने वाले इस ऐतिहासिक स्थल के आसपास रहने वाले आम नागरिकों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार अधिकारी कई बार गुहार लगाने के बावजूद केवल कोरे आश्वासन ही देते आ रहे हैं। धरातल पर हालात आज भी जस के तस बने हुए हैं।

ग्रामीणों की पुरजोर मांग—

परेशान ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, पर्यटन विभाग और राज्य सरकार से पुरजोर मांग की है कि बिना किसी देरी के बाघेश्वरी मंदिर से बौद्ध गुफाओं तक पक्की सड़क निर्माण का कार्य शुरू किया जाए। साथ ही क्षेत्र में स्वास्थ्य और पेयजल की व्यवस्था सुधारी जाए, ताकि विश्व पटल पर पहचान रखने वाले इस ऐतिहासिक क्षेत्र के बाशिंदों को भी एक सुगम और सम्मानित जीवन मिल सके।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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