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The indifference of officials emboldens adulterators, endangering the lives of the public; they are also accused of not answering calls.

The indifference of officials emboldens adulterators, endangering the lives of the public; they are also accused of not answering calls.

अधिकारी की उदासीनता से मिलावटखोरों के हौसले बुलंद, आम जनता की जान से खिलवाड़; कॉल न उठाने का भी आरोप

धार पुलिस की अनूठी पहल: खाद्य विभाग की कुंभकर्णी नींद के बीच संभाला सुरक्षा का मोर्चा।

धार। जिले में आम नागरिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर एक बेहद चिंताजनक स्थिति बनती जा रही है। जिस खाद्य सुरक्षा विभाग के कंधों पर बाजार में बिकने वाली खाद्य सामग्रियों की शुद्धता जांचने और मिलावटखोरी पर अंकुश लगाने का जिम्मा है, वह पूरी तरह से लापरवाही और उदासीनता की चादर ओढ़कर सोया हुआ है। विभाग की इसी निष्क्रियता के चलते अब धार पुलिस को नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा के लिए मोर्चे पर उतरना पड़ा है।

धार पुलिस द्वारा इन दिनों नागरिकों को जागरूक करने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस ने एक विस्तृत कैटलॉग जारी कर जनता को यह समझाया है कि दैनिक उपयोग में आने वाली खाद्य सामग्रियों की परख कैसे की जाए और उनकी शुद्धता की जांच खुद कैसे करें। इसके साथ ही पुलिस नागरिकों को खाद्य सुरक्षा मानकों (Food Safety Standards) के प्रति भी जागरूक कर रही है। पुलिस की इस पहल की जहां एक ओर सराहना हो रही है, वहीं दूसरी ओर यह सीधे तौर पर खाद्य विभाग के गाल पर एक तमाचा है।

अधिकारियों का रवैया: न उठाते फोन, न देते सही जवाब —

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पूर्व खाद्य सुरक्षा अधिकारी सचिन लोंगरिया के स्थानांतरण के बाद से यहां की व्यवस्थाएं पूरी तरह पटरी से उतर चुकी हैं। वर्तमान में पदभार संभाले हुए प्रभारी अधिकारी का रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना बना हुआ है। आरोप है कि यदि कोई जागरूक नागरिक या मीडियाकर्मी किसी स्थान पर अमानक व दूषित खाद्य सामग्री बेचे जाने की सूचना देने के लिए फोन करता है, तो प्रभारी अधिकारी कॉल उठाने में आनाकानी करते हैं।

कार्रवाई में देरी का फायदा उठा रहे मिलावटखोर —

अधिकारियों द्वारा समय पर रिस्पॉन्स न देने या घंटों बाद संपर्क करने के कारण सबसे बड़ा नुकसान यह हो रहा है कि अमानक खाद्य सामग्री बेचने वाले विक्रेताओं पर सही समय पर उचित कानूनी कार्रवाई नहीं हो पाती। जब तक विभाग सक्रिय होता है, तब तक मिलावटखोर साक्ष्य मिटा चुके होते हैं या माल खपा चुके होते हैं। विभाग की इस सुस्ती का खामियाजा धार शहर सहित जिले की आम जनता को अपने स्वास्थ्य को दांव पर लगाकर भुगतना पड़ रहा है।

जनता पूछ रही सवाल: क्या यह जान से खिलवाड़ नहीं?

जिले का एकमात्र प्रमाणित विभाग, जो यह तय करता है कि बाजार में बिकने वाली सामग्री खाने योग्य है या नहीं, वही आज अपनी जिम्मेदारियों से भाग रहा है। ऐसे में जागरूक नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिरकार खाद्य विभाग इस कुंभकर्णी नींद से कब जागेगा? क्या चंद लापरवाह अधिकारियों की वजह से लाखों नागरिकों की जान से सरेआम खिलवाड़ करने की छूट दी जा सकती है? प्रशासन को इस मामले को संज्ञान में लेकर तत्काल प्रभाव से दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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