4 घंटे कुर्सी से बांधकर पीटा, कान पर आए 7 टांके; जीपीएस से खुला राज।
शराब पीने के बहाने पीड़ित को बुलाया और कमरे में किडनैप करकर की बर्बरता से मारपीट।
पुलिसकर्मी के सामने युवक को पानी से नहलाया, खून से सने कपड़े बदलवाए और दूसरे कपड़े पहनाए।
धार। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर भेजे गए मैसेज को लेकर उपजा विवाद इस कदर हिंसक हो गया कि एक युवक को बंधक बनाकर कई घंटों तक अमानवीय यातनाएं दी गईं। पीड़ित की गर्दन पर नुकीली चीज अड़ाकर उसे कमरे में ले जाया गया, हाथ बांधकर लोहे की रॉड, लाठियों और लात-घूंसों से बेरहमी से पीटा गया और बर्बरता की हद पार करते हुए उसके अंतःवस्त्र (अंडरवियर) में तीखी मिर्च डाल दी गई।
यह सनसनीखेज वारदात 18 अक्टूबर की दोपहर करीब 1:15 से शाम 6:00 बजे के बीच ग्राम सेजवाया स्थित राजगिरी के शिव शक्ति ढाबे के पीछे बने कमरे में हुई। घटना के समय होटल संचालक राजगिरी भी वहां मौजूद थे।
पीड़ित देवेन्द्रवन (29 वर्ष, निवासी ग्राम मागोद), जो हातोद स्थित एक फैक्ट्री में मैनेजर हैं, कंपनी के काम से पीथमपुर आए हुए थे। इसी दौरान उन्हें फोन कर ढाबे पर बुलाया गया। वहां आरोपी बिट्टू उर्फ अशोक, पिंटू, रिंकू (सभी निवासी ग्राम सेजवाया) और उनके अन्य साथियों ने उन्हें बंधक बना लिया ओर करीब छः घंटे तक जमकर पिटाई करने के बाद आरोपियों ने घटना की जानकारी डेहरी चौकी के एक पुलिसकर्मी को दी, पुलिसकर्मी की मौजूदगी में उसके बताए अनुसार आरोपियों ने घटना के साक्ष छुपाने की नीयत से पीड़ित को नहलाया और खून से सने कपड़े बदले और दूसरे व्यक्ति के कपड़े पहनाकर रवाना कर दिया।
सूत्रों की माने तो कंपनी के आला अधिकारीयों ने इंदौर के बड़े पुलिस अफसर को फोन लगाकर घटना की जानकारी दी तो पुलिस थाना प्रभारी के कहने पर कंपनी की गाड़ी और ड्राइवर को छोड़ा गया।
आरोपियों ने देवेन्द्रवन पर मोबाइल का लॉक खोलने का दबाव बनाते हुए बर्बरता से पिटाई करने के बाद जान से मारने की धमकी भी दी। वहीं जान से मारने की नीयत से करीब चार घंटे तक चली इस मारपीट में पीड़ित के चेहरे, पीठ, जांघों और कूल्हों पर गंभीर चोटें आईं, जबकि कान पर गंभीर घाव के कारण 7 टांके लगाने पड़े। शाम को जब युवक का संपर्क नहीं हुआ, तो परिजनों और कंपनी के कर्मचारियों ने कंपनी की गाड़ी में लगे जीपीएस (GPS) को ट्रैक कर मौके पर पहुंचकर उसे मुक्त करवाया।
पीड़ित का मेडिकल परीक्षण धारेश्वर अस्पताल में कराया गया, जहां चोटों से जुड़े साक्ष्य भी दर्ज किए गए।
घटना के बाद पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया कि डेहरी चौकी पुलिस के एक कर्मी की मौजूदगी में साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से पीड़ित के खून से सने कपड़े बदलवाए गए। साथ ही मामले में अपहरण और गंभीर चोटों से जुड़ी कड़ी धाराएं न जोड़कर सामान्य धाराओं में मामला दर्ज करने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
डेहरी सराय चौकी पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर 19 अक्टूबर की रात अपराध क्रमांक 89/26 के तहत आरोपी बिट्टू उर्फ अशोक, पिंटू, रिंकू व अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 296(बी), 115(2), 351(3), 127(2) और 3(5) में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, पीड़ित और आरोपी आपस में रिश्तेदार हैं और यह पूरा विवाद सोशल मीडिया पर महिलाओं की आईडी व मोबाइल के उपयोग से उपजे भ्रम और बातचीत के कारण शुरू हुआ था।
फिलहाल नामजद आरोपियों की तलाश जारी है, वहीं घटना के बाद स्थानीय स्तर पर आक्रोश का माहौल है और मामले में पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर भी जांच की मांग उठ रही है।

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