त्योहारों की मिठास में मिलावट का जहर घोलने की आशंका, आम जनता की सेहत से खिलवाड़ कौन रोकेगा..?
विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल, आखिर कब होगी मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त जांच और कार्रवाई..?
सरदारपुर ओर कुक्षी तहसील में बाजार से सस्ती दरों पर क्यों बिक रहा घी, पनीर ओर मावा…?
धार। जैसे ही त्योहार का समय आता है वैसे ही बाजार में घी, मावा, पनीर और मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। इसी बीच खाद्य पदार्थों की शुद्धता और गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठने लगते हैं। बात अगर धार जिले की की जय तो यहां खाद्य पदार्थों में मिलावट की आशंकाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आम जनता को शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभाने वाला खाद्य सुरक्षा विभाग आखिर कितना सक्रिय है…?
घी, मावा और पनीर जैसे खाद्य पदार्थ हर घर की जरूरत हैं। इनका उपयोग मिठाइयों से लेकर दैनिक भोजन तक में शामिल होता है। यदि इन खाद्य पदार्थों में मिलावट होती है, तो इसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ सकता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों के लिए मिलावटी खाद्य सामग्री गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है। ऐसे में त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
कागजों में नहीं, बाजारों में दिखनी चाहिए जांच!!
- सवाल यह है कि क्या जिले में घी, मावा, पनीर और मिठाइयों की नियमित जांच हो रही है…?
- क्या संदिग्ध खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर अधिकृत प्रयोगशालाओं में उनकी जांच कराई जा रही है..?
- यदि कहीं मिलावट पाई जाती है, तो संबंधित कारोबारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाती है….?
खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि समय-समय पर बाजारों का निरीक्षण कर मिलावट की आशंका वाले खाद्य पदार्थों की जांच करना भी है। त्योहारों के समय विशेष अभियान चलाकर संदिग्ध प्रतिष्ठानों की जांच, नमूने एकत्रित करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही कौन तय करेगा..?
यदि बाजार में मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री हो रही है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं, यदि विभाग नियमित जांच कर रहा है, तो उसकी कार्रवाई और जांच के परिणाम भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि जनता को वास्तविक स्थिति का पता चल सके।
जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि त्योहारों को देखते हुए अब तक कितने प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया, कितने नमूने लिए गए, कितने नमूने अमानक पाए गए और कितने मामलों में संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। यह सब गोलमाल है क्योंकि खाद्य विभाग कार्रवाई करने के बजाय कागजी खानापूर्ति में लगा हुआ है।
त्योहारों की खुशियों पर भारी न पड़े लापरवाही !
त्योहार खुशियों, मेल-मिलाप और मिठास का प्रतीक हैं। लेकिन खाद्य पदार्थों में मिलावट की आशंका लोगों के स्वास्थ्य और भरोसे, दोनों के लिए चिंता का विषय है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मुनाफे के लालच में कोई भी कारोबारी लोगों की सेहत से खिलवाड़ न कर सके।
- अब सवाल धार जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग से है—क्या त्योहारों से पहले जिले में घी, मावा, पनीर और मिठाइयों की व्यापक जांच का अभियान चलाया जाएगा..?
- क्या जांच के नतीजे सार्वजनिक होंगे..? और यदि मिलावट की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार कारोबारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई कब होगी…?
- जनता को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि पारदर्शी जांच और प्रभावी कार्रवाई चाहिए। आखिर त्योहारों की मिठास में मिलावट का खतरा रोकने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा..?

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