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‘आदर्श मार्ग’ और प्रमुख बाजारों पर माफिया राज: दुकानदारों ने निगली पूरी सड़क, रेंगने को मजबूर शहर!

धार। शहर में अतिक्रमणकारियों और लापरवाह नगर पालिका के गठजोड़ ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। धार का तथाकथित ‘आदर्श मार्ग’ तो सिर्फ नाम का आदर्श रह गया है, हकीकत में संपूर्ण धार शहर इस समय अतिक्रमण के भंवर जाल में फंसा हुआ है। दुकानदारों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि उन्होंने फुटपाथ की सीमाएं लांघकर अब पूरी की पूरी मुख्य सड़कों पर ही परमानेंट कब्जा जमा लिया है।

शहर के सबसे व्यस्त और प्रमुख व्यापारिक रूटों पर स्थिति अब बर्दाश्त के बाहर हो चुकी है:

• मोहन टॉकीज, पिंजारवाडी से लेकर धान मंडी चौराहा: यह पूरा मार्ग इस समय अतिक्रमण का सबसे बड़ा अड्डा बन चुका है। फुटकर और बड़े दुकानदारों ने सड़कों को अपनी बपौती समझकर दुकानों का सामान बाहर तक फैला दिया है।
• आनंद चौपाटी से लेकर राजवाड़ा: ऐतिहासिक राजवाड़ा की ओर जाने वाला यह मार्ग पूरी तरह से चोक हो चुका है। पैदल चलने वाले राहगीरों के लिए एक इंच जगह नहीं बची है।

सड़कें बनी दुकानदारों का ‘शो-रूम’, नपा बनी मूकदर्शक!

नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए दुकानदारों ने रोड को इस कदर घेर लिया है कि फोर-व्हीलर तो दूर, दोपहिया वाहनों का निकलना भी दूभर हो गया है। नगर पालिका ने इन दुकानदारों को सिर्फ फुटपाथ पर जगह देने का झुनझुना थमाया था, लेकिन आज वही दुकानदार पूरी सड़क को लील चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि इस महाजाम और गुंडागर्दी पर नगर पालिका प्रशासन पूरी तरह मूकदर्शक बना बैठा है, जिससे साफ जाहिर होता है कि या तो अधिकारियों में इच्छाशक्ति की कमी है या फिर पर्दे के पीछे कोई बड़ी साठगांठ चल रही है।

त्योहारी सीजन और रोजमर्रा के ट्रैफिक का दम घूटा —

राजवाड़ा और धान मंडी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही होती है। सड़कों पर अवैध कब्जों के कारण एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन गाड़ियां भी यहां आकर फंस जाती हैं। जनता का पूछना है कि जब टैक्स पूरा लिया जाता है, तो मूलभूत सुविधाएं और साफ-सुथरी सड़कें क्यों नहीं मिल रहीं? क्यों धार की जनता को इन चंद रसूखदार अतिक्रमणकारियों के आगे बंधक बना दिया गया है?

यदि नगर पालिका और जिला प्रशासन ने तुरंत संयुक्त कार्रवाई कर मोहन टॉकीज, धान मंडी, आनंद चौपाटी और राजवाड़ा मार्ग से इस ‘अंगद के पैर’ जैसे अतिक्रमण को नहीं उखाड़ा, तो शहर की जनता उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होगी।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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