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संघ के पथ संचलन पर पुष्पवर्षा से स्वागत, घोष की धुन पर कदमताल करते निकले स्वयंसेवक

कुक्षी/धार। (लक्की जाजू) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने रविवार को पथ संचलन निकालकर सामाजिक एकता, अनुशासन और संगठन का संदेश दिया। नगर की सात बस्तियों और दस मोहल्लों में एक साथ निकले पथ संचलन में 200से अधिक स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। बाग में भी स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में अनुशासित कदमताल करते हुए नगर के विभिन्न मार्गों से संचलन निकाला।

बाग में घोष दलों के वादन के बीच कदम से कदम मिलाकर चलते स्वयंसेवकों ने आकर्षक दृश्य प्रस्तुत किया। आयोजन की विशेष बात यह रही कि इसमें बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक तीन पीढ़ियों के स्वयंसेवक एक साथ कदमताल करते नजर आए। कई स्थानों पर मातृशक्ति और छोटी बच्चियों ने आरती उतारकर तथा पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का आत्मीय स्वागत किया।

मंच पर रहे संघ के पदाधिकारी एवं मुख्य अतिथि

कार्यक्रम में बाग खंड संघचालक माननीय श्री मनोज काग एवं मुख्य अतिथि श्री कृष्णकांत जी झवर मंचासीन रहे। उनकी गरिमामयी उपस्थिति में पथ संचलन का आयोजन संपन्न हुआ।

हिंदू समाज को जातियों से ऊपर उठकर एकजुट होना होगा : ईश्वर जी बृजवासी

कार्यक्रम के दौरान धर्म जागरण धार विभाग के संयोजक ईश्वर जी बृजवासी ने सामाजिक एकता और हिंदू समाज की एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि हिंदू हम सब एक हैं, लेकिन आज हिंदू समाज विभिन्न जातियों में बंटा हुआ है। समाज को जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट होने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में समाज के सामने कई प्रकार की चुनौतियां और विपत्तियां आ सकती हैं। ऐसी परिस्थितियों का सामना करने के लिए सभी को एक साथ खड़ा होना होगा। जब समाज संगठित और एकजुट रहेगा, तभी बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकेगा। हमारा लक्ष्य भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने का है और इसके लिए सामाजिक एकता, आपसी समरसता तथा राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना आवश्यक है।

घोष दलों की गूंज के साथ दिखा अनुशासन

पथ संचलन के दौरान घोष दलों के वादन ने आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया। घोष की धुन पर स्वयंसेवक निर्धारित ताल और अनुशासन के साथ आगे बढ़ते रहे। मार्गों पर नागरिकों ने रुककर संचलन देखा और स्वयंसेवकों का स्वागत किया।

विशेष रूप से युवाओं और बच्चों की भागीदारी ने आयोजन को नई ऊर्जा दी। वहीं वरिष्ठ स्वयंसेवकों की उपस्थिति ने नई पीढ़ी को संगठन और अनुशासन की परंपरा से जुड़ने का संदेश दिया।

शाखा की साधना से राष्ट्रसेवा तक का संदेश

संघ की शाखा परंपरा में शारीरिक, बौद्धिक और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से स्वयंसेवकों में अनुशासन, सेवा और सामाजिक दायित्वों की भावना विकसित करने पर बल दिया जाता है। पथ संचलन इसी सामूहिक अभ्यास और संगठनात्मक भावना का सार्वजनिक स्वरूप माना जाता है।

बाग में आयोजित पथ संचलन के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट होकर राष्ट्र और समाजहित में कार्य करने की प्रेरणा दी गई। तीन पीढ़ियों की सहभागिता, घोष दलों का वादन, मातृशक्ति द्वारा आरती और पुष्पवर्षा से किया गया स्वागत तथा मंचासीन अतिथियों की उपस्थिति आयोजन के प्रमुख आकर्षण रहे।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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