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कलेक्ट्रेट में लोकायुक्त का बड़ा धमाका: ADM कार्यालय का बाबू ₹20,000 की घूस लेते रंगेहाथों धराया, मंचा हड़कंप!

उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन के प्रशासनिक संकुल (कलेक्ट्रेट) में गुरुवार (5 नवंबर 2026) को उस समय हड़कंप मच गया, जब लोकायुक्त पुलिस की टीम ने अचानक दबिश देकर एडीएम कार्यालय के बाबू को रिश्वत की गड्डियों के साथ दबोच लिया। आरोपी बाबू का नाम रोहित गोठवाल है, जो सहायक ग्रेड-3 के पद पर तैनात है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता बृजेश विश्वकर्मा (निवासी बिरलाग्राम, नागदा) ने लोकायुक्त को शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी माताजी विजयलक्ष्मी के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत किसी अन्य व्यक्ति को फर्जी गैस कनेक्शन जारी कर दिया गया था। इतना ही नहीं, सूचना के अधिकार (RTI) से पता चला कि उनकी मां के नाम पर 14 गैस सिलेंडर भी निकाल लिए गए, जबकि पीड़ित परिवार को न तो कनेक्शन मिला और न ही सिलेंडर।
इस फर्जीवाड़े की शिकायत बृजेश ने कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में की थी। कलेक्टर के आदेश पर खाद्य विभाग ने इसकी जांच की और जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी पाए जाने के बाद आगे की कार्रवाई के लिए फाइल को एडीएम (अपर कलेक्टर) कार्यालय भेज दिया गया।
फाइल आगे बढ़ाने के बदले मांगी थी ₹50,000 की घूस
खाद्य विभाग से फाइल एडीएम कार्यालय पहुंचने के बाद वहां पदस्थ बाबू रोहित गोठवाल ने मामले को रफा-दफा करने या शिकायतकर्ता के पक्ष में कड़ी कार्रवाई करने के एवज में ₹50,000 की रिश्वत की मांग की। परेशान होकर फरियादी बृजेश ने 29 अक्टूबर को लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक से इसकी लिखित शिकायत कर दी।
लोकायुक्त ने ऐसे बिछाया जाल
लोकायुक्त टीम ने शिकायत का गोपनीय सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया गया। गुरुवार को जैसे ही
शिकायतकर्ता बृजेश विश्वकर्मा कलेक्ट्रेट स्थित एडीएम दफ्तर पहुंचे और बाबू रोहित गोठवाल को रिश्वत की पहली किस्त के रूप में ₹20,000 नकद थमाए, वैसे ही सादे कपड़ों में तैनात लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगेहाथों दबोच लिया। लोकायुक्त टीम ने केमिकल से बाबू के हाथ धुलवाए, तो उसके हाथ गुलाबी हो गए।
एडीएम की भूमिका पर भी उठे सवाल
बाबू की इस गिरफ्तारी के बाद कलेक्ट्रेट में हड़कंप मच गया और कई अधिकारी अपने कमरों से बाहर आ गए। इस मामले में राजनीति भी गरमा गई है। जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष और कांग्रेस नेता भरत पोरवाल ने एडीएम अतेन्द्र सिंह गुर्जर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी फाइल पर अंतिम फैसला लेने का अधिकार सक्षम अधिकारी का होता है, बाबू का नहीं। ऐसे में बिना अधिकारी की शह के बाबू अकेले इतनी बड़ी रकम नहीं मांग सकता। उन्होंने मांग की है कि इस मामले में एडीएम की संलिप्तता की भी जांच की जाए।
लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी बाबू के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Anti-Corruption Act) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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