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रसूखदारों के आगे नतमस्तक प्रशासन! हॉस्पिटल ने सड़क को बनाया ‘निजी पार्किंग’, CMHO और नगर पालिका की भूमिका संदेह के घेरे में

धार में रसूखदारों के आगे नतमस्तक प्रशासन! तिरुपति हॉस्पिटल ने सड़क को बनाया ‘निजी पार्किंग’, CMHO और नगर पालिका की भूमिका संदेह के घेरे में।

धार। शहर में यातायात व्यवस्था को ठेंगा दिखाने का एक और बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक बार फिर एक निजी चिकित्सालय की मनमानी और प्रशासनिक सांठगांठ का बड़ा खेल उजागर हुआ है। शहर के तिरुपति हॉस्पिटल ने खुलेआम मुख्य सड़क को अपनी ‘निजी पार्किंग’ में तब्दील कर दिया है। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यातायात में बाधा बन रही इस अवैध पार्किंग को लेकर नगर पालिका और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग (CMHO) द्वारा दी गई अनुमतियाँ अब सीधे तौर पर संदेह के घेरे में आ गई हैं।
आम जनता त्रस्त, अस्पताल मस्त: वीआईपी रोड पर लग रहा जाम
स्थानीय नागरिकों और राहगीरों का कहना है कि तिरुपति हॉस्पिटल के सामने हर समय वाहनों का मेला लगा रहता है। अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के वाहन मुख्य सड़क पर ही पार्क करवा दिए जाते हैं। इसके चलते इस व्यस्त मार्ग पर दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। एम्बुलेंस से लेकर आम राहगीरों को यहाँ से निकलने में भारी मशक्कत करनी पड़ती है। जनता का सीधा सवाल है कि जब हर व्यावसायिक परिसर के लिए खुद की पार्किंग होना अनिवार्य है, तो तिरुपति हॉस्पिटल को सड़क पर पार्किंग करने की छूट क्यों और किस आधार पर दी गई?
संदेह के घेरे में ‘साहब’ की मेहरबानी: नियमों को ताक पर रखकर दी अनुमति?
सूत्रों की मानें तो इस पूरे अवैध खेल को प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है। नियमानुसार, किसी भी अस्पताल या कमर्शियल बिल्डिंग को मान्यता या एनओसी (NOC) देने से पहले पार्किंग स्पेस की जांच की जाती है। लेकिन तिरुपति हॉस्पिटल के मामले में नगर पालिका और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग (CMHO) ने सारे नियमों को ताक पर रख दिया।
मध्यभारत लाइव के तीखे सवाल:
  1. नगर पालिका से सवाल: क्या नगर पालिका की अनुमति की आड़ में सरकारी सड़क को किसी निजी अस्पताल के नाम पर गिरवी रखा जा सकता है?
  2. CMHO विभाग से सवाल: स्वास्थ्य विभाग ने बिना पर्याप्त पार्किंग स्पेस देखे इस अस्पताल को संचालन की अनुमति (Registration) कैसे दे दी? क्या अधिकारियों ने टेबल पर बैठकर ही सारी फाइलें पास कर दीं?
मिलीभगत या भ्रष्टाचार? जांच की मांग
शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि कोई आम नागरिक सड़क पर दो मिनट के लिए गाड़ी खड़ी कर दे, तो पुलिस और नगर पालिका का अमला चालान काटने पहुँच जाता है। लेकिन तिरुपति हॉस्पिटल द्वारा पूरी सड़क को ही पार्किंग बना देने पर जिम्मेदार अधिकारियों ने आँखों पर पट्टी बांध रखी है। यह मौन सहमति साफ इशारा करती है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।
अब देखना यह है कि इस खबर के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारी इस ‘संदेहस्पद अनुमति’ पर क्या एक्शन लेते हैं, या फिर रसूख के रूतबे के आगे नियम-कायदे इसी तरह दम तोड़ते रहेंगे।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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