कुक्षी/धार। श्रावण माह के प्रत्येक सोमवारी पर शिव लिंग की श्रृंगार पूजा का विशेष महत्व है। पहले सोमवार के अवसर पर अति प्राचीन बाबा जबरेश्वर महादेव मंदिर बाघ में श्रद्धा और भक्ति के साथ श्रृंगार पूजन किया गया।
इस अवसर पर गंगाजल, सुगंधित द्रव, घी, दूध, दही, मधु से भोले नाथ स्नान कराने के बाद फूल एवं बेल्व पत्र से श्रृंगार पूजा किया गया।
पुजारी महंत संजयपूरी गोस्वामी द्वारा बताया गया कि बाघ के परिवार के लाडले सुभम ओर शिवम पूरी गोस्वामी द्वारा आलौकिक श्रृंगार किया गया।
महंत संजय पूरी जी बताते हैं कि भगवान शिव को आशुतोष कहा गया है। अर्थात तत्काल प्रसन्न होने वाला। भगवान शिव जल और बेल्व पत्र से ही प्रसन्न होते हैं। शिव पुराण में कहा गया है कि त्रिदलम त्रिगुणाकारम त्रिनेत्रम एवं त्रयायुधम, त्रिजन्म पाप संहारम, एक विल्व शिवापर्णम, अर्थात तीन पतियों से युक्त बेल पत्र जो हम शिव को अर्पण करते हैं, वह हमारे तीन जन्मों के पापों का नाश करता है। त्रिगुणात्मक शिव की कृपा भौतिक संसाधनों से युक्त होती है। अत: श्रावण मास में भगवान को इस बेल्व पत्र के अर्पण करने से अधिक फल प्राप्त होता है।
कहा गया है कि श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार को अलग-अलग शिव लिंग पर मुठ्ठ चढ़ाई जाती है। श्रावण मास के प्रथम सोमवार को मुठ्ठ भर चावल, द्वितीय सोमवार को तिल्ल, तृतीय सोमवार को मूंग व चतुर्थ सोमवार को जौ चढ़ाने से फल की प्राप्ति होती है। अगर पांचवा सोमवार पड़े तो सत्तू चढ़ाना चाहिए।


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