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सांसद टिकट को लेकर भाजपा व कांग्रेस में दावेदार सक्रिय

सांसद टिकिट को लेकर भाजपा व कांग्रेस में दावेदार सक्रिय: एक दो दिन में घोषित होंगे प्रत्याशी के नाम।

भाजपा मोदी लहर तो कांग्रेस अपने 5 विधायको के सहारे जीत को लेकर भर रही दम।

धार। (मनोज कवि) लोकसभा चुनाव को लेकर यहां कांग्रेस व भाजपा दोनों दलों ने तैयारियां शुरू कर दी है। कांग्रेस भारत जोड़ो न्याय यात्रा के जरिए कार्यकर्ताओं में हुए उत्साह के संचार के साथ साथ संसदीय क्षेत्र में अपने 5 विधायको के बलः पर जीत का दम भरने की तैयारी में है। वही भाजपा मोदी लहर के जरिए जीत को लेकर आश्वस्त है।

वैसे अगर धार महू संसदीय क्षेत्र का इतिहास देखा जाए तो सबसे ज्यादा बार सांसद कांग्रेस का बना है। 2014 के पहले यह संसदीय सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थी। किन्तु उसके बाद यहां भाजपा ने जड़े मजबूत कर ली। 1967 से अब तक हुए लोकसभा चुनाव में से सबसे ज्यादा 7 बार कांग्रेस का इस सीट पर कब्जा रहा है। इसके बाद चार बार भाजपा व चार बार जनसंघ ने जीत दर्ज की। यह सीट अजजा वर्ग के लिए आरक्षित है। लगातार दस सालों से इस सीट पर भाजपा का कब्जा है।

पहले तीन चुनावों में, भारतीय जनसंघ ने धार पर अपना दबदबा बनाया. 1980 से 1991 तक कांग्रेस ने लगातार चार चुनाव जीते। 1996 में भाजपा ने वापसी की, लेकिन 1998 और 1999 में कांग्रेस ने फिर से जीत हासिल की। 2004 में भाजपा ने धार पर अपना कब्जा जमा लिया, लेकिन 2009 में कांग्रेस ने फिर से जीत हासिल की। वही 2014 और 2019 में, भाजपा ने लगातार दो बार जीत हासिल करते हुए अपनी पकड़ मजबूत कर ली। इस सीट पर आदिवासी मतदाताओं की संख्या अधिक होने के कारण चुनावों में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है।

कांग्रेस 5 विधायको के भरोसे —

धार महू संसदीय क्षेत्र में आठ विधानसभा शामिल है। जिसमें धार, महू व धरमपुरी में भाजपा तो बदनावर, सरदारपुर, कुक्षी, मनावर व गंधवानी में कांग्रेस का कब्जा है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 5 सीट जीती थी। 6 मार्च को बदनावर में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी कि भारत जोड़ो न्याय यात्रा के आगमन व आदिवासी जनसभा के माध्यम से कांग्रेस ने यहां चुनावी शंखनाद कर दिया है। सभा में उमड़ी भीड़ के बलबूते एवं अपने पांच विधायकों के सहारे कांग्रेस जीत का दम भरने में जुटी हुई है। कांग्रेस से पूर्व मंत्री सुरेंद्रसिंह हनी बघेल के साथ ही आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष राधेश्याम मुवेल, कांग्रेस की प्रवक्ता शुभांगनाराजें, जयस के महेंद्र कन्नौज दावेदार के रूप में सामने आए हैं। कांग्रेस ने आदिवासी सभा करने का यही उद्देश्य था कि इस वर्ग को अपने पक्ष में लाकर यह चुनाव जीत सके।

राहुल गांधी ने भी अपने पूरे संबोधन में सिर्फ आदिवासी समाज पर ही फोकस कर भाषण दिया था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कांग्रेस इस वर्ग को पूरी तरह अपने पक्ष में लाने के रणनीति बना रही है। कांग्रेस के पांच विधायक में से एक विधायक सामान्य भंवरसिंह शेखावत को छोड़कर सभी चार विधायक अजजा वर्ग के ही है। एक-दो दिन में कांग्रेस अपने प्रत्याशी का नाम घोषित कर सकती है।

बीजेपी विकास व मोदी लहर के भरोसे —

इस संसदीय सीट पर गत विधानसभा चुनाव में भाजपा तीन विधानसभा ही जीत पाई थी। अब इस लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ मोदी लहर एवं विकास के बल पर चुनावी मैदान में उतरने जा रही है। गत लोक सभा चुनाव में 1 लाख 56 हजार वोटो से भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। इस बार भी भाजपा राम मन्दिर के साथ मोदी लहर के मार्फत जीत को लेकर आश्वस्त है। हालांकि भाजपा इस सीट को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती है। यही कारण है कि अब तक अपना प्रत्याशी घोषित नहीं कर पाई है। यहां वर्तमान में भाजपा सांसद छतरसिंह दरबार काबिज है। अब उनका टिकट कटना तय माना जा रहा है। ऐसे में अब नए दावेदारों के नाम भी चर्चाओं में शुरू हो गए है।

सबसे प्रमुख दावेदार के रूप में यहां पूर्व केबिनेट मंत्री रंजना बघेल का नाम उभरकर सामने आया है। इसके अलावा गत लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी रहे दिनेश गिरवाल 3 साल पहले ही भाजपा में शामिल हो गए हैं। गिरवाल भी दावेदार है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के माध्यम से वे दावेदारी कर रहे है। इसके अलावा भाजपा के प्रदेश मंत्री जयदीप पटेल, पूर्व जिला पंचायत सदस्य वीरेंद्र सिंह बघेल, पूर्व सांसद सावित्री ठाकुर, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मालती पटेल, जिला पंचायत की पूर्व सदस्य जमुना भूरिया का नाम टिकट की दौड़ में चर्चाओं में चल रहा है।

राजूखेड़ी का नाम भी दौड़ में शामिल —

पूर्व सांसद गजेंद्रसिंह राजूखेड़ी कल कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गए हैं। 1980 में राजनीति जीवन में प्रवेश करते हुए भाजपा से ही इसकी शुरुआत की थी। राजूखेड़ी को भाजपा ने 1990 में पहली बार टिकट देकर कांग्रेस के तत्कालीन डिप्टी सीएम दिग्गज नेता शिवभानु सिंह सोलंकी के सामने मैदान में उतारा था। जिसमें राजूखेड़ी करीब 31000 वोटो से चुनाव जीतकर विधायक बने थे। इसके कुछ साल बाद वे कांग्रेस में शामिल हो गए थे। वे 1998, 1999 व 2009 में कांग्रेस के टिकिट पर लोकसभा लड़े ओर जीते। भाजपा में शामिल होने के बाद उनका भी दावेदारों की लिस्ट में नाम शामिल होना बताया गया है।

कौन कितनी बार बना सांसद —

भारतसिंह चौहान-चार बार, भारतीय जनसंघ।

गजेंद्रसिंह राजूखेड़ी-तीन बार, कांग्रेस।

सूरजभानू सोलंकी-दो बार, कांग्रेस।

छतरसिंह दरबार-तीन बार, भाजपा।

सावित्री ठाकुर-एक बार, भाजपा।

फतेहभानसिंह-एक बार, कांग्रेस।

प्रतापसिंह बघेल-एक बार, कांग्रेस।

प्रधान संपादक- कमलगिरी गोस्वामी

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