धार। विशेष संवाददाता: अनीश कामदार – ग्रामीण इलाकों के विकास के लिए सरकार द्वारा भेजी जा रही लाखों-करोड़ों की धनराशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है। ताज़ा मामला धार ज़िले की तिरला जनपद का है। यहाँ ग्राम पंचायत नानंदखेड़ा का सामने आया है, जहाँ विकास कार्यों के नाम पर भारी वित्तीय अनियमितताएं और धांधली के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच (प्रधान) और सचिव की मिलीभगत से सरकारी बजट का जमकर बंदरबांट किया गया है।
कागजों पर पूरी हुई सड़कें और नालियां —
ग्रामीणों द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) और ऑनलाइन रिकॉर्ड से निकाली गई जानकारी के अनुसार, गाँव के मुख्य मार्ग से लेकर आंतरिक गलियों तक सीसी रोड (कंक्रीट सड़क) और नाली निर्माण के नाम पर लाखों रुपए का भुगतान करा लिया गया है। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। आज भी गाँव की गलियां कीचड़ से बजबजा रही हैं और लोग गड्ढों से होकर गुजरने को मजबूर हैं।
मनरेगा में बड़ा फर्जीवाड़ा: ‘फर्जी मस्टर रोल’ से निकाला पैसा —
भ्रष्टाचार का एक बड़ा खेल महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में भी देखने को मिला है। ग्रामीणों का कहना है कि जो लोग गाँव में रहते ही नहीं हैं या जो अन्य शहरों में नौकरी कर रहे हैं, उनके नाम पर भी जॉब कार्ड बनाकर फर्जी हाजिरी लगाई गई और लाखों रुपए की मजदूरी निकाल ली गई। वहीं, नानंदखेड़ा गाँव के वास्तविक जरूरतमंद मजदूर काम के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
शौचालय और आवास योजना में भी ‘कमीशनखोरी’ —
प्रधानमंत्री आवास योजना और स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनने वाले शौचालयों में भी हितग्राहियों से सीधे तौर पर कमीशन की मांग की गई। कई ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि:
“आवास की पहली किस्त जारी करने के एवज में ₹10,000 से ₹20,000 तक की रिश्वत मांगी जाती है। जो पैसे नहीं देता, उसकी फाइल दबा दी जाती है या बहुत देरी की जाती है।”
नानंदखेड़ा पंचायत में फैली भ्रस्टाचार की गंदगी का जल्द ही बड़ा खुलासा मध्यभारत लाइव न्यूज़ के द्वारा किया जाएगा।

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