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तोरण द्वार का लोकार्पण व भव्य कलश यात्रा के साथ श्री मानस सम्मेलन का शुभारंभ

धार। अखिल भारतीय रामचरितमानस पर आधारित पांच दिवसीय मानस सम्मेलन का भव्य शुभारंभ कलश यात्रा से हुआ। प्रति वर्षानुसार इस वर्ष भी चतुर्भुज श्री राम मंदिर मांडव के श्री श्री 1008 महंत राम नारायण दास जी महाराज की 27 वीं पुण्य स्मृति में अखिल भारतीय मानस मंच पर रामचरितमानस सम्मेलन का आयोजन विधिवत रूप से ग्राम देदला धाम में हुआ।

पुर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता विक्रम वर्मा, सांसद छतरसिंह दरबार धार विधायक नीना वर्मा और अखिल भारतीय संत समिति के सचिव राधे राधे बाबा की उपस्थिति और महामंडलेश्वर डॉ. नरसिंह दास महाराज के मार्गदर्शन में देदला धाम के प्रवेश द्वार तोरण द्वार का लोकार्पण भी किया गया। विधायक नीना वर्मा की विधायक निधि से निर्मित तोरण द्वार का भव्य रूप से निर्माण किया गया है।

Inauguration of Toran Dwar and inauguration of Shri Manas Sammelan with grand Kalash Yatra.

विशाल और भव्य कलश शोभायात्रा निकाली।

अखिल भारतीय श्री मानस सम्मेलन महोत्सव की शुरुवात आज देदला धाम में विशाल कलश यात्रा के रूप में संतो की भव्य शोभा यात्रा से हुई। महामंडलेश्वर डॉक्टर नरसिंह दास महाराज के नेतृत्व और मार्गदर्शन में मानस सम्मेलन की शुरुवात हुई। शोभायात्रा की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की शोभायात्रा मार्ग को गाय के गोबर से लिप कर तैयार किया गया था और मार्ग पर रंगोली का निर्माण भी किया गया था। सम्पूर्ण यात्रा मार्ग को दुल्हन की तरह सजाया गया था। जब संत समाज और मातृशक्ति कलश सिर पर लेकर यात्रा मार्ग पर निकली तो लोगो ने भावविभोर होकर संतो और महामंडलेश्वरो की आरती उतार कर और पुष्प माला एवं पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। यह क्षण भावविभोर कर देने वाला था संत समाज के लिए भी। अनेक स्थानों पर स्वागत द्वार भी बनाए गए थे पूरे मार्ग पर भगवा ध्वज से साज सज्जा की गई थी।

Inauguration of Toran Dwar and inauguration of Shri Manas Sammelan with grand Kalash Yatra.

श्री मानस सम्मेलन हुआ शुभारंभ।

अखिल भारतीय रामचरितमानस पर आधारित पांच दिवसीय मानस सम्मेलन का भव्य शुभारंभ संत समाज के आतिथ्य में हुआ। श्री मानस सम्मेलन श्री राम कथा के मानस मर्मज्ञ वक्ता श्री 1008 महंत श्री राममोहनदास जी महाराज रामायणी कुल्लू हिमाचल प्रदेश ने पांच दिवसीय मानस सम्मेलन में रामचरित्र मानस के विषय में अपने विचार रखे और कई प्रसंगों को व्याख्या की। देश के प्रसिद्ध मानस मर्मज्ञ के मुखारविंद से कथा का श्रवण श्रोताओं ने किया।

प्रधान संपादक- कमलगिरी गोस्वामी

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