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Home » मध्यप्रदेश » शहर में अवैध सीजरों का आतंक, पुलिस पर भी उठ रहे सवाल

धार में अवैध सिजिंग का आरोप, गली-गली खुल रहे कथित ‘सीजर’ के ऑफिस।

फर्जी बैंक एजेंट या रिकवरी एजेंट बनकर वाहन उठाने का आरोप, आदिवासी वाहन मालिकों से बदसलूकी और दादागिरी की शिकायत।

धार। जिले में वाहन फाइनेंस की किस्तें वसूलने के नाम पर कथित अवैध सिजिंग का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ लोग खुद को बैंक एजेंट, रिकवरी एजेंट या फाइनेंस कंपनी का सीजर बताकर गली-मोहल्लों में अपने कार्यालय संचालित कर रहे हैं। एक-दो किस्तें बकाया होने पर कथित तौर पर वाहन मालिकों पर दबाव बनाया जाता है और विरोध करने पर दादागिरी तथा मारपीट तक की शिकायतें सामने आ रही हैं।

बताया जा रहा है कि इन कथित सीजरों द्वारा विशेष रूप से भोले-भाले आदिवासी वाहन मालिकों को निशाना बनाया जा रहा है। आरोप है कि किस्त जमा नहीं होने का हवाला देकर वाहन बलपूर्वक उठाने की कोशिश की जाती है। कुछ मामलों में किस्त के नाम पर राशि लेने के बावजूद वाहन वापस नहीं करने और बाद में वाहन को अन्य स्थान पर बेचने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।

कोतवाली थाना क्षेत्र का मामला चर्चा में —

ऐसा ही एक मामला धार के कोतवाली थाना क्षेत्र में सामने आने का दावा किया गया है। एक आदिवासी युवक के साथ वाहन की किस्त नहीं भरने की बात को लेकर कथित रूप से गाली-गलौज और मारपीट की गई तथा वाहन छीनने का प्रयास किया गया।

युवकों ने कथित सीजरों का विरोध किया और पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात सामने आई। मामला कोतवाली थाने तक पहुंचा, लेकिन आरोप है कि संबंधित लोगों के खिलाफ अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

पुलिस पर भी उठ रहे सवाल —

सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में युवकों ने आरोप लगाया कि वे शिकायत दर्ज कराने कोतवाली थाने पहुंचे, लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। पोस्ट में तत्कालीन थाना प्रभारी ईश्वरसिंह चौहान से मुलाकात का भी उल्लेख है। युवकों के अनुसार, उन्हें यह कहा गया कि किस्त नहीं भरने पर वाहन रिकवरी करने वाले इसी तरह वाहन ले जाते हैं।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

नियमों की आड़ में मनमानी का आरोप —

वाहन की रिकवरी के नाम पर किसी भी व्यक्ति के साथ धमकी, गाली-गलौज, मारपीट या जबरदस्ती किए जाने के आरोप गंभीर हैं। वाहन फाइनेंस कंपनियों और उनके रिकवरी एजेंटों की कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और संबंधित नियामकीय निर्देशों के अनुरूप होनी चाहिए।

ऐसे में सवाल उठता है कि यदि धार में वास्तव में बिना उचित अधिकार के लोग वाहन सीज करने का काम कर रहे हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई कौन करेगा? क्या संबंधित फाइनेंस कंपनियों ने इन लोगों को अधिकृत किया है? और यदि वे अधिकृत एजेंट हैं, तो क्या उनके पास वाहन जब्ती की वैध प्रक्रिया और दस्तावेज मौजूद हैं?

प्रशासन और पुलिस से जांच की मांग —

स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि धार शहर और जिले में संचालित कथित ‘सीजर’ कार्यालयों की जांच की जाए। संबंधित फाइनेंस कंपनियों से उनके एजेंटों की सूची और अधिकृत दस्तावेजों की जानकारी ली जाए तथा वाहन मालिकों से की गई कथित जबरदस्ती, वसूली और मारपीट की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

नोट: खबर में लगाए गए आरोप संबंधित व्यक्तियों/युवकों के कथन पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित फाइनेंस कंपनियों और पुलिस का पक्ष इस रिपोर्ट में शामिल किया है। जरूरत पड़ने पर शामिल किया जा सकता है।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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