madhyabharatlive

Sach Ke Sath

Home » मध्यप्रदेश » इंजेक्शन लगाने में लापरवाही पड़ी भारी : बच्चे की मौत के आरोप में डॉक्टर पर मुकदमा
Negligence in administering injection proved costly: Doctor sued for child's death

Negligence in administering injection proved costly: Doctor sued for child's death

इंजेक्शन लगाने में लापरवाही पड़ी भारी : बच्चे की मौत के आरोप में डॉक्टर पर मुकदमा

पीएम और क्यूरी रिपोर्ट में हुआ स्पष्ट कि मासूम माधव की मौत हुई ‘ड्रग रिएक्शन’ से।

धार। एक डॉक्टर की कथित लापरवाही ने सात साल के मासूम की जान ले ली। इलाज के दौरान दिए गए एक गलत इंजेक्शन के रिएक्शन ने हंसते-खेलते बच्चे को हमेशा के लिए सुला दिया। पुलिस ने मर्ग जांच की रिपोर्ट और मेडिकल ऑफिसर की पुष्टि के बाद आरोपी डॉक्टर के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।

यह पूरी घटना जिले के टांडा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम कालीदेवी की है। दरअसल, ग्राम कालीदेवी निवासी 7 वर्षीय मासूम माधव (पिता सूरज मेहड़ा) की तबीयत खराब होने पर परिजन उसे 15 जून (सोमवार) को टांडा में स्थित निजी डॉक्टर यशवंत (पिता केशरसिंह मंडलोई, निवासी भगतसिंह रविदास मार्ग, बदनावर) के पास इलाज के लिए ले गए थे। आरोप है कि डॉक्टर यशवंत ने लापरवाही बरतते हुए माधव के बाएं कूल्हे पर इंजेक्शन लगाया। इस इंजेक्शन के बाद बच्चे की तबीयत और ज्यादा बिगड़ गई, पैर में गंभीर सूजन आ गई और अंततः उसकी मृत्यु हो गई।

जांच के दौरान पुलिस ने जब मृतक की दादी सेकडीबाई के बयान दर्ज किए, तो इस घोर लापरवाही का खुलासा हुआ। इसके बाद ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और क्यूरी रिपोर्ट (विशेषज्ञ राय) ने भी इस बात की पुष्टि की कि मासूम माधव की मृत्यु ‘ड्रग रिएक्शन’ (दवाई के घातक असर) के कारण होना संभव है। चिकित्सकीय रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के आधार पर पुलिस ने आरोपी डॉ यशवंत मंडलोई का कृत्य अपराध की श्रेणी में पाया। घटना के बाद मर्ग क्रमांक 23/2026 धारा 194 बीएनएसएस के तहत लंबी जांच चली, जिसके कारण केस दर्ज होने में थोड़ा विलंब हुआ। आखिरकार 23 जून की रात 09:55 बजे टांडा पुलिस ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) के तहत मामला पंजीकृत किया।

थाना प्रभारी के निर्देश पर केस डायरी को आगे की विस्तृत जांच के लिए सौंप दिया गया है। पुलिस अब आरोपी डॉक्टर की डिग्री, क्लिनिक की वैधता और उपयोग किए गए इंजेक्शन की गुणवत्ता की जांच कर सकती है। इस मामले के बाद क्षेत्र में बिना विशेषज्ञता या उचित सावधानी के प्रैक्टिस करने वाले निजी डॉक्टरों और क्लिनिकों पर प्रशासन की निगरानी और सख्त होने की संभावना है, ताकि भविष्य में किसी अन्य मासूम को अपनी जान न गंवानी पड़े।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

error: MADHYABHARAT LIVE Content is protected !!