17/06/2024

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कर्ज के बोझ तले तभी मध्य प्रदेश सरकार, सवा तीन लाख करोड़ का कर्ज़

सवा तीन लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज फिर भी 10000 करोड़ के नए कर्ज लेना मजबूरी। फिर भी कर रही मध्य प्रदेश सरकार उपलब्धियों का गुणगान।

भोपाल। लाड़ली बहना और अन्य मुफ्त सुविधाओं की घोषणाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार द्वारा क़र्ज़ लेने का सिलसिला जारी हैं।

इस मामले में सिर्फ मप्र सरकार ही नही भारत सरकार, गुजरात सरकार और अन्य राज्यों की सरकारों के भी यहीं हालात हैं, बहरहाल हम बात करे भारत सरकार की तो 20 मार्च 2023 को सांसद नागेश्वर राव के एक सवाल के जवाब में वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि 31 मार्च 2023 तक भारत सरकार पर 155 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है।
इस संबंध में बताया जाता हैं की 2014 में सरकार पर कुल कर्ज 55 लाख करोड़ रुपए था, यानि 67 साल में भारत सरकार पर कुल 55 लाख करोड़ रुपए का कर्ज था, पिछले 9 साल में भारत पर कर्जा तिगुना हो गया हैं यानि 100 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा कर्ज मात्र पीछले 9 साल में बढ़ गया हैं यानि अब एक सौ चालीस करोड़ भारतीयों पर 155 लाख करोड़ का कर्ज हो गया है।

इसी कड़ी में बता दें कि अलग-अलग समय में लिए गए लोन के कारण अभी मप्र की जनता के ऊपर सवा तीन लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज हो गया है। लगातार कर्ज लेने का ये सिलसिला बजट सत्र से पहले शुरू हुआ था जो अब तक जारी है। विपक्ष भी सरकार के इतनी बड़ी मात्रा में कर्ज लेने को लेकर हमलावर है।

उधर देश भर में प्रसारित गुजरात के विकास माडल वाले गुजरात राज्य पर 2021-2022 में 3 लाख 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज था, सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र में चर्चा के दौरान यह बताया। सरकार ने बीते साल 23 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ब्‍याज चुकाया, राज्‍य में प्रति व्‍यक्ति कर्ज का भार 511166 रुपये है।
बता दें कि 2022-2023 में गुजरात राज्य में पिछले वर्ष की तुलना में 17 हजार करोड़ की बढ़ोतरी के साथ 2 लाख 44 हजार करोड़ का जन-केंद्रित बजट पेश किया गया है।

क्यों पड़ रही है राज्यों को कर्ज की जरूरत, बात करतें हैं मप्र की

बीते दिनों केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक ने शिवराज की घोषणाओं के पूरा ना होने पर पत्र लिखा था। शिवराज सरकार की 10 साल की घोषणाएं अभी तक पेंडिंग पड़ी हुई हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मप्र की खाली पड़ी घोषणाओं को पूरा करने के लिए क्या कर्ज ही एकमात्र ऑप्शन है।

उल्लेखनीय हैं कि 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए गेम चेंजर मानी जा रही लाड़ली बहना योजना शुरू होने के 4 महीने के भीतर ही शिवराज सरकार के लिए जंजाल बनती जा रही है। दरअसल, महिला वोटर्स को लुभाने के लिए शिवराज सरकार ने 1.25 करोड़ महिलाओं के बैंक खातों में 1 हजार रुपए डालने की शुरुआत तो कर दी है, लेकिन इस लोक लुभावन योजना के चलते सरकार के ऊपर वित्तीय बोझ बढ़ता जा रहा है। ये काफी नहीं था कि शिवराज सरकार आए दिन और भी नई-नई मुफ्त की योजना की घोषणा करती जा रही है। इन मुफ्त की स्कीमों के वित्तीय बोझ से निबटने के लिए शिवराज सरकार अब अलग-अलग तरह की तिकड़म भिड़ा रही है। कभी वो अनुपूरक बजट से पैसा जुगाड़ रही है, तो कभी विभिन्न विभागों को अपना रेवेन्यू कलेक्शन बढ़ाने के लिए फरमान दें रही है और कभी वो क़र्ज़ ले रही है। हालत यह हैं कि पिछले 1 साल में मध्य प्रदेश के सरकारी कर्ज के ग्राफ में 1 लाख करोड़ रु की बढ़ोत्तरी हुई है।

लाड़ली बहना योजना का अंक गणित यू समझे

इस प्रसिद्ध योजना को लांच करते वक़्त मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी इस महत्वाकांक्षी और क्रांतिकारी योजना का लाभ अधिकतम 1 करोड़ महिलाओं को देने की बात की थी। यानी महीने में 1000 करोड़ रुपए और सालभर में 12000 करोड़ रुपए का खर्चा। लेकिन योजना में उम्मीद से ज्यादा रेजिस्ट्रेशन हुए और 1 करोड़ 25 लाख 5 हज़ार 9 सौ 47 महिलाएं योजना के लिए पात्र हुई। यानी उम्मीद से करीब 25 लाख ज्यादा पात्र। लिहाजा उसे हर महीने 1250 करोड़ रुपए के बजट की जरूरत होगी और सालाना 15 हजार करोड़ रुपए की। अब 1 मार्च, 2023 को जो राज्य बजट पेश हुआ था, उसमें लाडली बहना योजना के लिए सिर्फ 8 हजार करोड़ रुपये ही तय हुए थे। जो कि पहले ही योजना की सालभर की जरुरत से कम थे…सिर्फ 8 महीने (जनवरी 2023) तक के लिए। उसपर हितग्राही बहनो की संख्या बढ़ने से शिवराज सरकार पर करीब सवा करोड़ यानी 1 करोड़ 25 लाख महिलाओं के खाते में हर महीने 1 हजार डालने का दबाव आ गया है। लिहाजा अब उसे हर महीने 1250 करोड़ रुपए के बजट की और सालाना 15 हजार करोड़ रुपए के बजट की जरुरत है। हाल ही में शिवराज ने घोषणा की है कि योजना की राशि धीरे-धीरे 3000 रुपए प्रति हितग्राही प्रतिमाह तक बढ़ा दी जाएगी…अगर ऐसा हुआ तो ऐसी स्थिति में सरकार को हर महीने सवा करोड़ महिलाओं के लिए 3 हजार 750 करोड़ रुपए की जरुरत होगी और सालाना 45 हजार करोड़ रु. का खर्च। अब इसी जरुरत को पूरा करने के लिए अनुपूरक बजट, रेवेन्यू टारगेट बढ़ाने और सरकार क़र्ज़ जैसे हर जरुरी तरीके अपना रही है।

विदित हो कि मध्य प्रदेश में विधानसभा का मानसून सत्र 10 जुलाई से शुरू होने जा रहा हैं – मध्य प्रदेश में नवंबर-दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव के कारण इस वर्ष शीतकालीन सत्र नहीं होगा। सरकार इस सत्र में द्वितीय और बजट सत्र में तृतीय अनुपूरक बजट प्रस्तुत करती है। तो वहीँ अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव के कारण वर्ष 2024-25 के आम बजट के स्थान पर लेखानुदान प्रस्तुत होगा – इस 5 दिवसीय सत्र में सरकार वित्तीय वर्ष 2023-24 का पहला अनुपूरक बजट पेश करेगी। यह लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का हो सकता है। इसमें सवा 4 हजार करोड़ रुपये अकेले मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना के लिए प्रस्तावित हैं।

ज्ञात हो कि अनुपूरक बजट के बावजूद योजना के बजट में कुछ कमी न रह जाए, इसके लिए वित्त मंत्रालय ने सरकार के 6 अलग-अलग विभागों से अपना रेवेन्यू कलेक्शन टारगेट 10 फीसदी तक बढ़ाने की बात कही है। इन विभागों में जो मुख्य हैं – परिवहन विभाग, ऊर्जा विभाग, राजस्व विभाग, लोकसंपत्ति प्रबंधन विभाग, कमर्शियल टैक्स विभाग, और माइनिंग विभाग।

जैसा हमने पहले बताया कि सरकार ने सिर्फ लाड़ली बहनों के लिए ही अपना ख़ज़ाना नहीं खोला है, बल्कि समाज के अन्य वोटरवर्ग के वोट बटोरने के लिए लाड़ली बहना योजना जैसी ही कई और भी लोकलुभावन फ्री स्कीम्स की घोषणा की है। लाड़ली बहना योजना की तरह इन घोषणाओं का भी सरकारी खजाने पर भारी-भरकम असर पड़ा है।

मप्र में रोजगार सहायकों की संख्या- 23 हजार

घोषणा से पहले वेतन पर सालाना खर्च- 248.40 करोड़
घोषणा के बाद वेतन पर सालाना खर्च बढ़ा- 496.80 करोड़
खजाने पर बोझ पड़ा- 248.40 करोड़ रु. का 23 जून 2023 को कर्मचारियों का डीए 4 परसेंट बढ़ाने के ऐलान का असर

मप्र में कर्मचारियों की संख्या- 7.5 लाख

केंद्र की तरह कर्मचारियों का डीए 42 फीसदी हुआ
वेतन में बढ़ोतरी 1600 रु. से लेकर 6 हजार रु. तक
खजाने पर बोझ- 450 करोड़ रु. से ज्यादा

किसान सम्मान निधि योजना में किसानों को 6 हजार रु. देने की घोषणा का असर

योजना के पात्र किसानों की संख्या- 87 लाख
घोषणा से पहले सरकार देती थी- 3480 करोड़ रु.
घोषणा के बाद सरकार देगी- 5220 करोड़ रु.
खजाने पर बोझ- 1740 करोड़ रु.

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की वेतन बढ़ोत्तरी

प्रदेश में 97135 आंगनबाड़ियों में: 96028 कार्यकर्त्ता और 83183 सहायिका हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में ₹3000 की प्रतिमाह बढ़ोतरी की घोषणा हुई है और अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ₹13000 प्रति माह मिलेगा। इसके अलावा आंगनबाड़ी सहायिकाओं के मानेदय में 750 की बढ़ोतरी की है, अब यह मानदेय बढ़कर 5,750 रुपए प्रतिमाह हो गया है। इससे बढ़ोत्तरी से सरकार पर करीब 35 करोड़ 4 लाख 37 हज़ार का भार सरकार पर हर महीने बढ़ेगा। यानी साल भर का 420 करोड़ रु का भार।

उपरोक्त मुफ्त और वेतनवृद्धि की घोषणाओं के अलावा स्वतंत्रता संग्राम और लोकतंत्र सेनानियों को 25 हजार की जगह 30 हजार रु. हर महीने, दिवंगत सेनानियों के परिवार को 5 हजार रु. की जगह 8 हजार रु. हर महीने, 12 वीं में फर्स्ट आने वाली छात्राओं को ई स्कूटी, गांव की बेटी और प्रतिभा किरण योजना के तहतत स्कॉलरशिप, बैगा, भारिया, सहरिया जनजाति की महिलाओं के लिए आहार अनुदान योजना जैसी कई योजनाओं का ढेर लगा हुआ है। विपक्षी दल कांग्रेस भी घोषणाएं करने में पीछे नहीं है। कांग्रेस ने भी घोषणाएं की है, जैसे – नारी सम्मान योजना के तहत 1500 रु. हर महीने, 500 रु. में गैस सिलेंडर, 100 यूनिट तक 100 रु. बिजली बिल, पुरानी पेंशन योजना और किसानों की कर्जमाफी आदि।

2023 के पहले 6 महीनें में ही लिया 30 हजार करोड़ का कर्ज

मध्य प्रदेश सरकार इस साल के 6 महीनों में अब तक अलग-अलग तारीखों पर 11 बार कर्ज ले चुकी है। जनवरी, फरवरी, मार्च, मई और जून में सरकार ने RBI से लोन लिया है।

जनवरी में 2 हजार रुपए करोड़ का कर्ज
फरवरी में 4 बार में 12000 करोड़ का लोन
मार्च में 3 बार में 10000 करोड़ का कर्ज
मई में 2000 करोड़ रुपए
जून में 4000 करोड़ में रुपए

तारीखों से हिसाब से लोन

25 जनवरी 2023- 2000 करोड़
02 फरवरी 2023- 3000 करोड़
09 फरवरी 2023- 3000 करोड़
16 फरवरी 2023-3000 करोड़
23 फरवरी 2023- 3000 करोड़
02 मार्च 2023- 3000 करोड़
09 मार्च 2023- 2000 करोड़
17 मार्च 2023- 4000 करोड़
24 मार्च 2023- 1000 करोड़
29 मई 2023- 2000 करोड़
14 जून 2023- 4000 करोड़

चुनाव तक जारी रहेगा क़र्ज़ लेने का सिलसिला

लाड़ली बहना और अन्य मुफ्त सुविधाओं की घोषणाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए क़र्ज़ लेने का ये सिलसिला यही नहीं रुकने वाला है, बल्कि RBI (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) के एक बुलेटिन में ये खुलासा हुआ है कि मप्र सरकार आगामी नवम्बर के चुनाव की आचार संहिता लगने से पहले RBI से जुलाई से सितंबर माह के बीच 3 माह में 10 हजार करोड़ का लोन लेगी। अक्टूबर माह के पहले सप्ताह में चुनाव की आचार संहिता लग जाएगी। इसके पहले 2 हज़ार करोड़ का एक लोन जुलाई माह में, फिर अगस्त महीने में 2 हजार करोड़ के दो लोन और सितंबर माह में भी 2 हजार करोड़ के दो लोन लिए जाएंगे। लोन लेने कि प्रक्रिया को लेकर MP सरकार ने RBI से बातचीत भी कर ली है।

कब-कब लेगी मप्र सरकार कर्ज

18 जुलाई- 2 हजार करोड़ रुपए
14 अगस्त- 2 हजार करोड़ रुपए
29 अगस्त- 2 हजार करोड़ रुपए
5 सितंबर- 2 हजार करोड़ रुपए
21 सितंबर- 2 हजार करोड़ रुपए

योजनाओं की पूर्ती के लिए सरकार निरंतर कर्ज ले रही है और लोग समाज कल्याण में लगी सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने में व्यस्त हैं।

वरिष्ठ पत्रकार विक्रम सेन खुलासा लाइव।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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