धार। शहर का सबसे व्यस्त और संवेदनशील त्रिमूर्ति नगर चौराहा इन दिनों बिना सिग्नल के चल रहा है। कई दिनों से बंद पड़ी ट्रैफिक सिग्नल लाइट्स के कारण यहां वाहन चालकों की मनमानी बढ़ गई है, जिससे हर वक्त हादसे का डर बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि इसी रास्ते से जिले के तमाम बड़े अधिकारियों का रोजाना आना-जाना होता है, इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
नियम ताक पर, अपनी-अपनी रफ्तार —
सिग्नल बंद होने से चौराहे पर ट्रैफिक पूरी तरह असंतुलित हो गया है। चारों दिशाओं से आने वाले वाहन बिना रुके निकल रहे हैं, जिससे टकराव की स्थिति लगातार बन रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां पहले भी कई बड़े हादसे हो चुके हैं, जिन्हें रोकने के लिए ही सिग्नल लगाए गए थे।
लाखों खर्च, फिर भी बेकार —
यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए लगाए गए सिग्नल पर लाखों रुपए खर्च किए गए, लेकिन अब वही सिस्टम शोपीस बनकर रह गया है। लंबे समय से बंद सिग्नल जिम्मेदारों की लापरवाही को साफ उजागर कर रहा है।
जिम्मेदारों पर उठे सवाल —
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जिला प्रशासन और पुलिस का इस ओर ध्यान क्यों नहीं गया? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है या फिर इसे जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?
क्या कहते हैं जिम्मेदार —
नगर पालिका धार प्रकाश प्रभारी रेनू वर्मा ने बताया कि सिग्नल में सॉफ्टवेयर संबंधी समस्या आई है, जिसे जल्द ही ठीक कर दिया जाएगा।
धार यातायात थाना प्रभारी प्रेमसिंह ठाकुर ने बताया कि इंदौर से इंजीनियर बुलाया गया है और जल्द ही सिग्नल को सुचारू रूप से चालू कर दिया जाएगा।
फिलहाल, शहरवासियों को डर है कि अगर जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो त्रिमूर्ति चौराहा फिर किसी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है।

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