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टिकट बदलने का दौर जारी, बगावत व भय का माहौल

कांग्रेस ने फिर बदले चार टिकिट, फिर भी बगावत व भय का माहौल!

कांग्रेस को सता रहा हार का डर!, अंतिम तिथि आते आते और टिकिट बदलने की संभावना!

टिकिट बदलने के बाद कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ी, अन्य दलों में हुए शामिल!

धार। (राकेश साहू) कांग्रेस ने सर्वे रिपोर्ट के आधार पर टिकिट दिए थे। टिकिट देने के लिए कांग्रेस ने सर्वे करवाए थे। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर जिताऊ उम्मीदवार को टिकिट दिए गए। टिकिट देने के उपरांत दिग्विजय सिंह व कमलनाथ के बीच टिकिटों को लेकर आपसी खींचतान, गुटबाज़ी भी मीडिया में चर्चा का विषय रही। दिग्विजय सिंह अपने समर्थकों को टिकिट देने का दवाब बना रहे थे। सर्वे रिपोर्ट के बाद अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के द्वारा टिकिट फाइनल होने के बाद अब ऐसी क्या मजबूरी आ गई जिससे कांग्रेस को दो बार टिकिट बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा। बार बार टिकिट बदलने से बगावत के स्वर और ज्यादा बढ़ गए। प्रदेश के हर जिले में जिसे टिकिट नहीं मिला। वह असंतुष्ट होकर नाराज हो गया। हर कोई टिकिट चाहता है, टिकिट न मिलने की दशा में विरोध प्रदर्शन, और दवाब बनाकर हर कोई टिकिट को बदलवाना चाहते हैं। टिकिट नहीं मिलने से नाराज नेता निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में फार्म भरने की धमकी जैसी शिकायते और ज्यादा बढ़ रही हैं। टिकिट वितरण के बाद पार्टी के अंदर मचे घमासान का पटाक्षेप करने की बजाय पार्टी दबाव में आकर टिकिट बदल रही हैं। जिससे ऐसा लगता है कि कांग्रेस में आत्मविश्वास की कमी व पराजय का भय दिखाई दे रहा है। कांग्रेस के नेताओं में आपसी खींचतान, गुटबाज़ी जोरो से चल रही हैं, आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है, आपसी तालमेल की कमी साफ दिखाई दे रही हैं। बगावत के डर से कांग्रेस को पराजय का डर सता रहा है जिससे कांग्रेस की सत्ता में आने की उम्मीदों पर पानी फिर सकता हैं!

धार जिले में तीन विधानसभा क्षेत्रों में टिकिट नहीं मिलने से हुई बगावत।

आपको बता दें कि धार जिले की तीन विधानसभा क्षेत्रों में असंतोष व्याप्त हैं। धरमपुरी विधानसभा क्षेत्र में तीन बार के पूर्व सांसद गजेन्द्र सिंह राजुखेड़ी को टिकिट नहीं मिलने से पार्टी पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए अपना इस्तीफा संगठन को भेज दिया। बदनावर विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय उम्मीदवार की मांग पिछले कई सालों से चली आ रही हैं और टिकिट नहीं मिलने के कारण निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने का फैसला ले लिया गया है। इसी प्रकार धार विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के उम्मीदवार को आश्वासन मिलने व चुनाव की तैयारी करने की झंडी मिलने के बाद विश्वासघात का आरोप लगाते हुए जन भावना के विपरीत टिकिट देने में सौदेबाजी का आरोप भी कुलदीप सिंह बुंदेला के द्वारा लगाया गया है और अपने एक हजार कार्यकताओं के साथ सभी पदों से इस्तीफा देते हुए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतरने का फैसला ले लिया गया है।

भाजपा में भी मच रहा बवाल, खुलेआम कर रहे बगावत।

वहीं भाजपा की बात करें तो यहीं हाल भाजपा में भी खुलेआम बगावत चल रही हैं। मनावर से भाजपा की वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री श्रीमती रंजना बघेल को टिकिट नहीं मिलने से नाराज होकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में खड़े होने की घोषणा की गई हैं। इसी प्रकार बदनावर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के राजेश अग्रवाल ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा की है। वहीं गंधवानी विधानसभा क्षेत्र में रमेश जूनापानी के द्वारा असंतोष के स्वर सुनाई दे रहे हैं। वहीं हम बात करें धार विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राजीव यादव को टिकिट नहीं मिलने से नाराजगी जताते हुए 29 अक्टूबर को कार्यकर्ताओं व समर्थकों से विचार विमर्श के बाद निर्णय लिया जायेगा। राजीव यादव ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि परिवार वाद, वंशवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री विक्रम वर्मा लम्बे समय से पार्टी पर कब्जा जमाकर बैठे हुए हैं और अन्य किसी भी नेता, कार्यकर्ताओं को आगे नहीं आने दे रहे हैं। विक्रम वर्मा 1977 से स्वयं चुनाव लड़ते चले आ रहे हैं और उसके बाद उनकी धर्मपत्नी श्रीमती नीना वर्मा चुनाव लड़ती आ रही हैं और अब अपनी बेटी को भी राजनीति में लाने के लिए निर्वाचन नामावली में नाम दर्ज करवाया गया है। विक्रम वर्मा ने धार जिले में अनेक नेताओं को आगे नहीं बढ़ने दिया। जिनमें प्रमुख रूप से अनंत अग्रवाल, प्रभु राठौड़, दिलीप पटोंदिया, विनोद शर्मा, शैलेश कामरेड, अशोक जैन, डॉ शरद विजयवर्गीय, करण सिंह पंवार, आदि नेताओं की उम्र ही निकल गई। अब राजीव यादव उनके निशाने पर हैं।

कांग्रेस दो बार टिकिटों में बदलाव कर चुकी हैं।

कांग्रेस ने पहले तीन टिकिटो में बदलाव किया था, अब चार टिकिटों को बदला गया है। अभी प्रदेश के अन्य जिलों में कुछ टिकिटों को बदलने के लिए आपसी घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस के नेता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र देकर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में फार्म भरने की धमकी, कांग्रेस संगठन को निरंतर देते हुए दबाव बना रहे हैं। कांग्रेस के नेताओं ने टिकिटों की सौदेबाजी के आरोप भी लगाए हैं। ऐसी हालत में अन्तिम तिथी आते आते कांग्रेस कुछ और टिकिट बदल सकती हैं या बदलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

आपको बता दें कि कांग्रेस ने आज बुधवार को चार प्रत्याशियों को बदले जाने की घोषणा की है, जिन चार सीटों पर प्रत्याशी बदले हैं उसमें सुमावली, पिपरिया, बड़नगर और जावरा विधानसभा सीट शामिल है। इसमें सुमावली से कुलदीप सिकरवार को बदलकर विधायक अजब सिंह कुशवाहा को, पिपरिया से गुरुचरण खरे की जगह विरेंद्र बेलवंशी को, बड़नगर से राजेन्द्र सिंह सोलंकी की जगह मुरली मोरवाल को और हिम्मत श्रीमाल की जगह जावरा से वीरेंद्र सिंह सोलंकी को टिकट दिया गया है।

संपादक- कमलगिरी गोस्वामी

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