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100 की रफ्तार, 0 इंतजाम! त्रिमूर्ति चौराहे पर हादसों को दावत दे रहा बंद सिग्नल, जनता में आक्रोश।

धार जिले में चरमराई ट्रैफिक व्यवस्था: एकमात्र लगा सिग्नल भी वर्षों से बंद, घोड़ा चौपाटी पर हादसे का डर, प्रशासन मौन।

प्रशासनिक अनदेखी की हद! धार के त्रिमूर्ति चौराहे पर शो-पीस बनी ट्रैफिक लाइट, घोड़ा चौपाटी पर हर पल हादसे का डर।

धार। मध्य प्रदेश के क्षेत्रफल और आबादी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण और बड़े जिलों में शुमार धार इन दिनों एक गंभीर प्रशासनिक अनदेखी का शिकार है। जिले की लगातार बढ़ती आबादी और वाहनों के दबाव के बीच यहाँ की यातायात (ट्रैफिक) व्यवस्था पूरी तरह से भगवान भरोसे चल रही है। स्थिति यह है कि पूरे जिले में यातायात को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक संसाधनों का घोर अभाव है।
एकमात्र ट्रैफिक सिग्नल भी हुआ ‘सफेद हाथी’
चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे जिले के एकमात्र मुख्य शहर में प्रशासन ने भारी दबाव के बाद एक ट्रैफिक सिग्नल लाइट लगाई तो थी, लेकिन वह भी केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई। देखरेख के अभाव और प्रशासनिक लापरवाही के चलते यह एकमात्र सिग्नल भी पिछले काफी समय से बंद पड़ा है। लाखों रुपये की लागत से लगा यह सिग्नल अब राहगीरों के लिए सिर्फ एक शो-पीस (सफेद हाथी) साबित हो रहा है।
घोड़ा चौपाटी पर मंडरा रहा है हादसों का खतरा !!
शहर के सबसे व्यस्ततम और संवेदनशील इलाकों में से एक घोड़ा चौपाटी क्षेत्र की स्थिति तो और भी बदतर है। इस चौराहे पर चारों तरफ से वाहनों का भारी दबाव रहता है। स्थानीय निवासियों और राहगीरों द्वारा लंबे समय से यहाँ ट्रैफिक सिग्नल लाइट लगाने की मांग की जा रही है। बेहद आवश्यकता होने के बावजूद, स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
प्रशासन की इस खुली अनदेखी और लापरवाही के कारण घोड़ा चौपाटी पर आए दिन जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे न केवल आम जनता का समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि हर वक्त किसी बड़े सड़क हादसे का खतरा भी मंडराता रहता है।
जनता में भारी आक्रोश —
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इतने बड़े जिले के मुख्य चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल न होना और लगे हुए सिग्नलों का बंद रहना, प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है। अधिकारियों की इस अनदेखी के कारण वाहन चालक खुद ही ट्रैफिक संभालने को मजबूर हैं, जिससे अक्सर विवाद की स्थितियां भी निर्मित हो जाती हैं।
अब देखना यह होगा कि इस खबर के बाद कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन जागता है या धार की जनता को इसी तरह जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ेगा।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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