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Sach Ke Sath

धार ने रचा विश्व कीर्तिमान,  वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज

हजारों राम भक्तों ने सामूहिक रूप से श्रीराम रक्षा स्त्रोत का पाठ किया।

शहर की हर बस्ती का प्रतिनिधित्व हुआ, कारोबार बंद कर व्यापारी बंधुओं ने की सहभागिता।

धार। हर घर, हर गांव से लेकर नगर व बस्ती सहित शहरों तक राम भक्तों का उत्साह व जज्बा देखने काबिल रहा। बच्चों से लेकर महिलाओं और बुजुर्गों तक काफी उत्साह देखा गया। नन्हे बच्चे एवं महिलाएं रामधुन के साथ भगवा ध्वज हाथ में लेकर ऐसे चल रहे थे मानो राम लला से मिलने जा रहे हो।

राजा भोज की धारा नगरी भी आज धन्य हुई।

अयोध्या से लेकर धार तक श्री रामोत्सव की धूम है। रविवार की शाम को यहां उदाजी राव चौपाटी (घोड़ा चौपाटी) पर हजारों परिवारों ने श्रीराम रक्षा स्त्रोत का सामूहिक पाठ करके एक कीर्तिमान स्थापित किया। इसमें शहर के व्यापारी शाम चार बजे अपने प्रतिष्ठानों को मंगल कर आयोजन में सहभागी बनें। एक साथ हजाराें लोगों ने सस्वर पाठ किया और वर्ल्ड रिकार्ड  में दर्ज करवाया है। यह कीर्तिमान भोज नगरी के राम भक्त हमेशा याद रखेंगे। इस राम रक्षा स्त्रोत के पाठ से हर सनातनी ने अपने ऊपर राम की रक्षा का कवच भी प्राप्त कर लिया है।

Dhar created a world record, registered in the world record

राम मंदिर में श्री राम लला की प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव धार में रविवार की शाम से ही शुरू हो गया। जो अगले 24 घंटे तक अविरत जारी रहेगा। यह कीर्तिमान केवल एक प्रमाण पत्र के लिए नहीं है, बल्कि यह कीर्तिमान सामाजिक एकता समरसता और प्रभु श्रीराम के प्रति आस्था के प्रति समर्पण का कीर्तिमान है। जो यह दर्शाता है कि हर सनातनी अपने प्रभु श्री राम के प्रति समर्पित है। कार्यक्रम स्थल भगवामय होने के साथ राम भक्ति से ओत प्रोत था।

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रामलला प्राण-प्रतिष्ठा के पूर्व संध्या रविवार को धार नगर के उदाजी राव चौपाटी पर हज़ारों परिवार एकत्रित हुए। राम रक्षास्तोत्र व हनुमान चालीसा का पाठ किया। धार नगर के हिंदू समाज ने श्री राम रक्षा स्त्रोत का सामूहिक पाठ करके विश्व कीर्तिमान भी रचा। दीपावली की चमक व दमक के रंग के उत्साह में श्रीरामजी का हर भक्त रविवार की शाम को एक की संकल्प के साथ घर से निकला की उसे उस आयोजन में शामिल होना है। जो राममार्गी रास्ते पर ले जाता हो। शाम चार बजे से लोगों की आवाजाही शुरू हो गई थी। शहर में ऐसा वातावरण संभवत: पहले कभी नहीं रहा। आयोजन स्थली की सज्जा इस तरह की गई थी की यहां राम कृपा की शीतल छाया हो। यहां कोई छोटा न बड़ा था। एक साथ एक बिछायत पर बैठ राम भक्तों ने पाठ शुरू किया। उर्जा का ऐसा संचार हुआ कि पूरे वातावरण में पाठ के श्लोकों की मीठास घुल गई।

इसमे भक्ति स्वर प्रदान करने में श्री पं निलेश व्यास व श्री पं गोपाल जोशी के साथ श्रीराम मंदिर मांडू के 21 बटुकाें ने अपना योगदान दिया। आयोजन समिति के विनय आग्रही भाव की स्वीकार किया और रामोत्सव कार्यक्रम में सकल हिंदू समाज की मौजदूगी ने आयोजन के गौरव को बढ़ा दिया। धार की धरा की यह परंपरा रही भी और रहेगी। रविवार की शाम को आयोजन की शुरूआत में पंडित श्री देशराज वशिष्ठ द्वारा गायन की प्रस्तुति दी गई। इसके बाद सामूहिक रूप से तबला वादन किया गया।

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संघर्ष गाथा सुन रोम-रोम में राम भक्ति की शक्ति आई – इस आयोजन में 500 साल से राम मंदिर के लिए जो संघर्ष किया जा रहा था, उसे स्लाइड शो के माध्यम से बताया गया। यह क्षण खास थे। हर किसी के रोम-रोम में राम भक्ति की शक्ति आई। साथ ही उन बलिदानियाें का प्रति सभी ने शीश नमाया, जिनके योगदान के बिना यह पल संभव नहीं था। आयोजन स्थल पर हर किसी की आंखें नम हो गई थी। बलिदानियाें के प्रति श्रद्वा की यह एक सच्ची श्रद्वांजलि थी। संघर्ष गाथा सुनते समय हर कोई जड़ हो गया था क्योंकि संघर्ष की गाथा के हर शब्द व चित्र राम काज के प्रति आस्था का संचार कर रहे थे।

ये हुए आयोजन—

श्रीराम जी की प्रभुता का गायन किया गया।

13 बार विजय मंत्र का गायन किया।

हनुमान चालीसा का पाठ किया गया।

स्वयं सेवकाें ने संभाली व्यवस्था—

नगर के सभी चौराहों को सुसज्जित किया गया। पार्किंग व्यवस्था को लेकर भी तैयारियां की गई थी। त्रिमूर्ति चौराहे की ओर से आने वाले के लिए उदाजी राव यानी घोड़ा चौपाटी से किला मैदान में तथा शहर से आने वाले के लिए मोहन टाकीज होते हुए बस डिपो परिसर पर पार्किंग स्थल बनाए था। वहीं निशक्तजनों व शारीरिक समस्या वाले बंधू, भगिनी के लिए अलग से बैठने की व्यवस्था भी समिति द्वारा की गई थी। आयोजन की व्यवस्था को अनुशासित स्वयं सेवकों ने संभाला।

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