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फाइलों के उस्ताद, त्योहारों के बाहुबली: सोशल मीडिया पर खाद्य विभाग की ‘मौसमी फुर्ती’ का उड़ा मज़ाक!

सोशल मीडिया पर छाया खाद्य विभाग: जनता बोली— “त्योहारों पर ही क्यों जागता है सिस्टम, बाकी 10 महीने कुंभकरणी नींद क्यों?”

धार। ईन दिनों सोशल मीडिया पर एक अनोखी ‘तारीफ’ और तीखा तंज चर्चा का विषय बना हुआ है। इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो रहे वीडियो और पोस्ट्स के अनुसार, खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) त्योहारों के सीजन में अचानक सड़कों पर उतरकर भारी छापेमारी कर रहा है, जिसे लेकर जनता विभाग की कार्यशैली पर जमकर चुटकियां ले रही है। सोशल मीडिया पर लोग तंज कसते हुए लिख रहे हैं कि विभाग का ‘जलवा’ सिर्फ दिवाली और त्योहारों के इर्द-गिर्द ही देखने को मिलता है, जबकि साल के बाकी महीने अफसर दफ्तरों के वातानुकूलित कमरों में फाइलों को मेंटेन करने में ही व्यस्त रहते हैं।
त्योहार आते ही ‘सुपर एक्टिव’, बाकी दिन ‘सुपर स्लीपर’
फेसबुक और इंस्टाग्राम पर वायरल हो रहे टेक्स्ट मैसेजेस में जनता का दर्द और गुस्सा साफ झलक रहा है। सोशल मीडिया यूज़र्स का कहना है कि जब तक त्योहार नहीं आते, तब तक शहर में धड़ल्ले से अस्वच्छ और मिलावटी खाद्य सामग्रियां बिकती रहती हैं। हाल ही में सोया चाप बनाने वाली यूनिट्स, दूषित समोसे और रसायनों से रंगी हरी सब्जियों के कई हैरान करने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं, जिन्होंने खाद्य सुरक्षा की पोल खोल दी है।
जनता का सीधा सवाल है कि जब आम दिनों में ये दूषित सामग्रियां परोसी जा रही होती हैं, तब विभाग ‘कुंभकरणी नींद’ में क्यों सोया रहता है? क्या आम दिनों में नागरिकों की सेहत की कोई कीमत नहीं है?

कागजी घोड़ों और फाइलों को चमकाने में बीतता है वक्त!

वायरल पोस्ट्स में इस बात को प्रमुखता से उठाया गया है कि खाद्य विभाग के अधिकारी केवल विभागीय कागजी कार्रवाई पूरी करने और फाइलों को मेंटेन करने में माहिर हैं। पूरे साल केवल फाइलों में ‘ऑल इज वेल’ दिखाकर कागजी घोड़े दौड़ाए जाते हैं और जैसे ही कोई बड़ा त्योहार नजदीक आता है, कैमरे और मीडिया की सुर्खियों के लिए अचानक गाड़ियां सड़कों पर दौड़ने लगती हैं। रातों-रात फैक्ट्रियों और होटलों पर छापे मारकर क्विंटल के हिसाब से खराब मावा या मिठाइयां नष्ट की जाती हैं।

जनता की मांग: 365 दिन चले अभियान, न कि सिर्फ ‘त्योहारी सीजन’

सोशल मीडिया पर भड़के लोगों का कहना है कि विभाग का यह ‘मौसमी जलवा’ अब नहीं चलेगा। मिलावटखोरों पर लगाम लगाने के लिए केवल अक्टूबर-नवंबर की भागदौड़ काफी नहीं है। उपभोक्ताओं ने मांग की है कि खाद्य सुरक्षा विभाग को अपनी इस कार्यप्रणाली में सुधार करना चाहिए और फाइलों से बाहर निकलकर पूरे 365 दिन जमीनी स्तर पर औचक निरीक्षण (Surprise Inspections) करना चाहिए, ताकि लोगों को हर दिन शुद्ध और सुरक्षित भोजन मिल सके।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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