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अस्पताल में न पार्किंग की जगह, न फायरफाइटर का रास्ता; धार के हॉस्पिटल में सुरक्षा भगवान भरोसे, अफसर मेहरबान!

धार के तिरुपति हॉस्पिटल का सड़क पर ‘कब्जा’, कटघरे में नगर पालिका और CM&HO; नियमों को ठेंगा दिखाकर कैसे मिली अनुमति?

धार। मध्य प्रदेश के धार शहर के तिरुपति हॉस्पिटल द्वारा सड़क पर किए गए अवैध कब्जे और पार्किंग व्यवस्था न होने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस अव्यवस्था ने धार नगर पालिका और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CM&HO) की कार्यप्रणाली और उनके द्वारा दी गई अनुमति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता अब यह पूछ रही है कि जब अस्पताल परिसर में बुनियादी सुविधाएं ही गायब थीं, तो इसे संचालित करने का ग्रीन सिग्नल कैसे मिल गया?

नियमों को ताक पर रखकर दी गई अनुमति!

अस्पताल संचालकों के लिए सरकार की नई गाइडलाइन बेहद स्पष्ट है। नए नियमों के मुताबिक, किसी भी चिकित्सालय परिसर के भीतर मरीजों और तीमारदारों के वाहनों के लिए पूर्ण पार्किंग व्यवस्था होना अनिवार्य है।
इसके बावजूद, धार के तिरुपति हॉस्पिटल में इस नियम की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। पार्किंग स्पेस न होने के कारण अस्पताल आने वाले वाहन सड़कों पर खड़े होते हैं, जिससे आम जनता को भारी ट्रैफिक जाम और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में नगर पालिका और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों द्वारा दी गई अनुमति सीधे तौर पर संदेह के घेरे में है।

सुरक्षा से खिलवाड़: फायरफाइटर के लिए जगह नहीं —

कोरोना काल के भीषण अनुभव के बाद चिकित्सालयों की सुरक्षा और सैनिटाइजेशन को लेकर कड़े नियम बनाए गए थे। कोविड के समय सैनिटाइज़र छिड़काव के लिए फाइटर मशीनों को घुमाना कितना ज़रूरी था, यह सबने देखा है।
नई आपातकालीन गाइडलाइन के अनुसार, किसी भी अनहोनी या आगजनी की स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल परिसर के चारों ओर इतना पर्याप्त स्थान होना चाहिए कि फायरफाइटर (दमकल वाहन) आसानी से पूरे परिसर में घूम सकें और राहत कार्य चला सकें। लेकिन तिरुपति हॉस्पिटल ने सड़क तक कब्ज़ा कर रखा है, जिससे आपातकालीन वाहनों का घूमना तो दूर, पास से गुज़रना भी दूभर है। यदि कल को कोई बड़ा हादसा या आगजनी होती है, तो इस घोर लापरवाही के कारण होने वाले नुकसान का जिम्मेदार कौन होगा?

अधिकारियों की चुप्पी पर उठते सवाल!

सड़क पर सरेआम हुए इस कब्जे और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर नगर पालिका प्रशासन और मुख्य चिकित्सा अधिकारी की रहस्यमयी चुप्पी कई सवाल खड़े करती है:
  • क्या अनुमति देने से पहले परिसर का भौतिक सत्यापन नहीं किया गया था?
  • क्या रसूख के आगे जनता की सुरक्षा और सरकारी गाइडलाइन को बौना मान लिया गया?
शहर की जनता अब इस मामले में जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रही है, ताकि किसी बड़ी अनहोनी को वक्त रहते टाला जा सके।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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