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Home » मध्यप्रदेश » MP-11 धार » नो-पार्किंग जोन, पार्किंग में तब्दील मुख्य मार्ग, प्रशासन ने मूंदी आंखें

नगर पालिका एवं स्थानीय पुलिस प्रशासन की अनदेखी और लापरवाही का आलम, फुटपाथ पर कब्जाधारियों के हौसले बुलंद।

धार के हृदय स्थल पर अतिक्रमण का ‘विनायक’ संकट: वीआईपी रोड पर रसूखदारों की अवैध पार्किंग, आम जनता त्रस्त।

मेडिकल लाइन के दिग्गज का नया संस्थान बना राहगीरों के लिए आफत।

धार। शहर की यातायात व्यवस्था दिनों-दिन बदतर होती जा रही है, जिसका सबसे बड़ा कारण नगर पालिका और स्थानीय पुलिस प्रशासन की घोर अनदेखी और लापरवाही है। प्रशासन की इसी सुस्ती का फायदा उठाकर फुटपाथ और मुख्य मार्गों पर कब्जाधारियों के हौसले बुलंद हैं। ताजा और सबसे गंभीर मामला शहर के रोटरी क्लब के ठीक सामने से सामने आया है, जहां धार में मेडिकल लाइन के ‘भीष्म पितामह’ कहे जाने वाले वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. उमेश कुमार मित्तल साहब का नया संस्थान ‘विनायक हॉस्पिटल’ संचालित हो रहा है। विनायक हॉस्पिटल के ठीक सामने मुख्य सड़क पर इस कदर अतिक्रमण और अवैध पार्किंग का साम्राज्य फैल चुका है कि आम जनता का पैदल चलना भी दूभर हो गया है।

अस्पताल बड़ा, पर पार्किंग की व्यवस्था ‘शून्य’

गौर करने वाली बात यह है कि इतने बड़े चिकित्सा संस्थान को शुरू करने से पहले पार्किंग की मुकम्मल व्यवस्था नहीं की गई। विनायक हॉस्पिटल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के वाहन बेतरतीब ढंग से मुख्य मार्ग पर ही पार्क करवा दिए जाते हैं। रोटरी क्लब के सामने वाली यह सड़क शहर की प्रमुख सड़कों में से एक है, जहां चौबीसों घंटे भारी यातायात रहता है। लेकिन अस्पताल की इस अव्यवस्था के कारण यह व्यस्त रोड अब एक स्थाई ‘अवैध पार्किंग लॉट’ में तब्दील हो चुका है।

एंबुलेंस संचालक दायमा का सड़क पर ‘कब्जा’

सड़क पर चल रहे इस खुले अतिक्रमण में केवल मरीजों के वाहन ही नहीं, बल्कि एक निजी एंबुलेंस संचालक की मनमानी भी चरम पर है। सूत्रों के मुताबिक, एंबुलेंस संचालक दायमा द्वारा बाकायदा सड़क के एक बड़े हिस्से को घेरकर अपनी एंबुलेंस गाड़ियां खड़ी की जा रही हैं। इन निजी एंबुलेंस वाहनों पर बड़े-बड़े अक्षरों में ‘अनुबंधित विनायक हॉस्पिटल’ लिखा हुआ है। अस्पताल के नाम की आड़ में सड़क पर यह कब्जा जोरों पर चल रहा है, जिससे हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है।

जिम्मेदार मौन, वीआईपी रसूख के आगे नतमस्तक पुलिस और नपा?

जनता के बीच अब यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या रसूखदार नाम होने के कारण नगर पालिका का अतिक्रमण दस्ता और स्थानीय यातायात पुलिस इस ओर देखने से कतरा रही है? आम आदमी अगर सड़क पर दो मिनट गाड़ी खड़ी कर दे, तो पुलिस चालान काटने पहुंच जाती है, लेकिन विनायक हॉस्पिटल के सामने तमाशा बन चुकी यातायात व्यवस्था पर जिम्मेदार अधिकारियों ने पूरी तरह से आंखें मूंद रखी हैं।
स्थानीय निवासियों और राहगीरों ने प्रशासन से मांग की है कि इस अव्यवस्था को तत्काल संज्ञान में लिया जाए, सड़क से अवैध एंबुलेंस और वाहनों का अतिक्रमण हटाया जाए, ताकि शहरवासियों को इस रोजाना के जाम और मानसिक प्रताड़ना से मुक्ति मिल सके।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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