मोहन सरकार के राज मे सरपंच सचिव का बोल बाला।
धार। जहां एक और वित्तीय मामलों में पारदर्शिता के लिए शासन स्तर पर हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं, इसी को मद्देनजर रखते हुए शासन ने दो से तीन वर्ष में तबादला पॉलिसी संचालित कर रखी है, ताकि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को अधिक समय न होने से भ्रष्टाचार को रोकने में सहायता मिल सके।
वहीं जिम्मेदारों और बिचौलियों की मिलीभगत के सामने सभी प्रयास नाकाम साबित हो रहे हैं। पंचायत सचिवों के दलालों और बिचौलियों के नाकाम मंसूबों पर आरोप प्रत्यारोप चालू हो जाते हैं। इन्हीं दलालों और बिचौलियों की वजह से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाएं पंचायतों में अनदेखी एवं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है।
ऐसा ही एक ताजा मामला धार जिले की तिरला जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत नानंदखेड़ा का है, जहां पर शासन के द्वारा पंचायत को आवंटित की गई वित्त आयोग की राशि को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में आने-जाने के लिए खर्च की जा रही है जिसके बिल पंचायत दर्पण से स्क्रीनशॉट लेकर के खबर के साथ प्रकाशित किए जा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन बिलों को पास करने वाले ग्रामीण एवं पंचायत यंत्री द्वारा किस आधार पर इन बिलों को स्वीकृति प्रदान की जाती है और पंचायत के सरपंच सचिव द्वारा मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में जाने के लिए गाड़ियों के भाड़े के बिल पंचायत दर्पण पर कैसे लगाए गए। ग्राम पंचायत के विकास के लिए आवंटित की गई राशि का दुरुपयोग किसके कहने पर किया जा रहा है, क्या यह भ्रष्टाचार का उदाहरण नहीं है।
पंचायत दर्पण पर सरपंच सचिव करते हैं फर्जी बिल अपलोड —
पंचायत दर्पण पोर्टल पर अधिकांश पंचायतों के सरपंच-सचिवों द्वारा फर्जी बिल-बाउचर अपलोड कर लाखों रुपए आहरित किए जाते है। ऐसा ही एक ताजा उदाहरण तिरला जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत नानंदखेड़ा का है, जहां पर शिकायत के बाद बौखलाए पंचायत सचिव ने एक दलाल को समझौते के लिए भेजा जब दलाल की दाल नहीं गली तो फेसबुक पर अनर्गल आरोप लगाना प्रारंभ कर दिए।
पंचायत पोर्टल पर लगाए गए बिलों का सत्यापन करने वाले कोई नहीं है। अगर है भी तो वह उसे नजर अंदाज क्यों कर रहे है, हैरानी की बात तो यह कि पंचायतों के द्वारा पोर्टल पर अपलोड किए गए बिल-बाउचर धुंधले लगाए जाते हैं। आखिर ऐसा क्यों किया जाता है, यह एक जीता जागता उदाहरण है कि वहांके जनप्रतिनिधि और पंचायत सचिवों के द्वारा मिली भगत करके काले कारनामों को छुपाने के लिए उन्हें धुंधला कर दिया जाता है।
गौरतलब है कि ऐसा ही एक मामला जनपद पंचायत तिरला के ग्राम पंचायत नानंदखेड़ा का प्रकाश में आया है। जहां पंचायत में किए गए या नहीं किए गए कार्यों एवं मटेरियल, एवं मटेरियल खरीदी के नाम पर फर्जी और धुंधले बिल बाउचर लगाकर शासकीय राशि खुर्द-बुर्द की जा रही है। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में जाने के लिए गाड़ियों के बिल भी खुलेआम लगाए गए हैं।
धुंघले बिलों की आड़ में हो रहा खेला —
ग्राम पंचायतों में पंचायत दर्पण में अपलोड किए जाने वाले बिलो की धुंधली या ना पढ़े जा सकने वाले बिलो को अपलोड किया जा रहा है, ग्राम पंचायत ऐसे बिलो की आड़ में बड़ा फर्जीवाड़ा, बड़े पैमानें पर कर रही है। पंचायतों में किए गए विकास कार्यों के संबंध में पारदर्शिता के लिए पंचायत दर्पण एप पर किए गए कार्यों व बिलों की जानकारी अपलोड किया जाना जरूरी होता हैं।
पारदर्शिता के लिए संचालित की गई पंचायत दर्पण ऐप पर किए गए धुंधले बिल अपलोड —
ऐसे में ग्राम पंचायत नानंदखेड़ा में भुगतान किए गए कई बिल धुंधले दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में पता नहीं चल रहा कि उन्होंने कहां से क्या और कितने रुपए का सामान खरीदा है ओर खर्च किया गया है। इस पंचायत में निमार्ण कार्यों के लिए लाखों की राशि खर्च की गई। बिलों में पारदर्शिता नहीं होने से पंचायतों में हुए कार्यों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सरकार की बहुउद्देशीय योजनाओं को पलीता लगाते मंत्री सरपंच —
सरकार के द्वारा संचालित की जा रही योजनाओं एवं पारदर्शिता के उद्देश्य से संचालित की जा रही पंचायत दर्पण में अपलोड किए गए ये केवल कुछ बिल बाउचर है। अगर सभी बिलों की पड़ताल की जाए तो लाखों रुपए का घोटाला सामने आ सकता है, धुंधले बिल से यह जाहिर नहीं हो पाता कि बिल सही लगा है या गलत। आखिर ऊपर बैठे जिम्मेदार अधिकारी इसको रोकने में समर्थ क्यों नहीं है, यह एक बड़ा सवाल है।
नोट:- इस खबर का प्रकाशन पंचायत दर्पण से डाटा लेकर प्रसारित किया गया है।
क्या कहते हैं ? पंचायत के जिम्मेदार —
नानंदखेड़ा पंचायत सचिव रंजीत लववंसी द्वारा एक बिचौलिए को रिस्वत देने के लिए भेजा जाता है, जब उसकी दाल नही गलती है, तब उस दलाल के द्वारा सोशल मीडिया फेसबुक पर आरोप प्रत्यारोप लगाए जाते है।

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