madhyabharatlive

Sach Ke Sath

स्वयं इतना शक्तिशाली बनो ताकि अपने भाई ओर पति की रक्षा कर सको और जरूरत पड़े तो पिता की भी

धार। केंद्रीय विद्यालय की मार्शल आर्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह के अवसर पर महिला थाना धार की निरीक्षक रेनू अग्रवाल बतौर मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुई।

रेनू अग्रवाल ने बताया कि मैं जहाँ जाती हूँ वहाँ मेरे पुलिस अधीक्षक महोदय श्री मनोज कुमार सिंह सर एवं पुलिस विभाग को ही रिप्रेजेंट करती हूँ।

यह मिशन महिलाओ के लिए सुरक्षित पर्यटन योजना के तहत मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग एवं पुलिस विभाग के माध्यम से संचालित की जा रही है, जिसमे वसुधा संस्था की अहम भूमिका है।

स्वामी विवेकानंद जी का कथन “स्ट्रैंथ इस लाइफ वीकनेस इस डेथ ” quote करते हुए बताया कि उनका स्ट्रेंथ से आशय हर तरह की स्ट्रेंथ से था.. किसी भी उन्नत शिक्षा व्यवस्था में संपूर्ण व्यक्तित्व विकास वही है जिसमें शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक सभी पहलुओं को समान रूप से विकसित किया जावे।

मस्तिष्क का आहार किताबें हैं, अध्ययन है तो इमोशंस का आहार सेवा भाव, दूसरों की भावनायें समझना सहायता करना है। वही शरीर का आहार व्यायाम, कठोर श्रम है ये self diffence जिसकी शुरुआत आप आज कर रहे हैं ये भी है और ये तीनों एक दूसरे से संबद्ध हैं। इन तीनों में से एक पहलू भी अनदेखा किया गया तो हम संपूर्ण विकास से वंचित रह जाएंगे। 

मार्शल आर्ट का उदय तो भारत में ही हुआ था एवं भारत के ही एक संत बोधिधर्म इसे भारत से बाहर लेकर गए थे और वहां इसका प्रचार प्रसार किया।

मार्शल आर्ट्स या शारीरिक शिक्षा की परंपरा भारत में शुरुआत से रही है। मानसिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा के साथ-साथ शारीरिक शिक्षा का भी ज्ञान गुरुकुल में दिया जाता था। मार्शल आर्ट आत्मरक्षा के लिए अति आवश्यक है। जिससे की छात्राएं विषम परिस्थितियों का सफलतापूर्वक सामना कर अपने स्वाभिमान की रक्षा कर सकें !

मैं भारतीय संस्कृति को दिल में बसाती हूं लेकिन कुछ सामाजिक मान्यताओं से पीड़ा होती है जैसे कि राखी के बदले भाई बहन की रक्षा करेगा और शक्ति दुर्गा के रूप में स्त्री को केवल पूजेंगे।

अब मेरी प्यारे बच्चों मैं आपसे कहना चाहती हूं कि इतनी शक्तिशाली बन जाओ कि अपने भाई की रक्षा तुम करलो, पति की तुम कर लो और जरूरत पड़े तो पिता की भी। इस शक्ति अर्जन की शुरुवात तुमने इस शिविर में कर दी है बस इस सिलसिले को जीवन के किसी पड़ाव पर रोकना मत।

इसके निरंतर अभ्यास से आपकी एकाग्रता बढ़ेगी, आत्म विश्वास एवं निर्णय क्षमता बढ़ेगी आलस्य दूर होगा और जीवन में जीत की ललक जागेगी ये मेरा खुद का अनुभव है।

प्रधान संपादक- कमलगिरी गोस्वामी

Spread the love