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शिक्षा व्यवस्था पर सवाल: छात्रावासों में सुरक्षा से लेकर जर्जर स्कूल भवनों तक

जिले में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल: कन्या छात्रावासों में सुरक्षा से लेकर जर्जर स्कूल भवनों तक कई मामले सामने आए।

धार। जिले में सरकारी शिक्षा व्यवस्था से जुड़े हालिया मामलों ने छात्र-छात्राओं की सुरक्षा, छात्रावास प्रबंधन और स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अलग-अलग क्षेत्रों से छात्रावासों में अव्यवस्था, छात्राओं की शिकायतें, जर्जर भवन और स्कूल परिसरों में सुरक्षा संबंधी घटनाएं सामने आई हैं। कुछ मामलों में प्रशासन ने जांच और कार्रवाई भी शुरू की है।

छात्रावासों में शिकायतों का सिलसिला

डही कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास में करीब 60 से 70 छात्राएं रात में थाने पहुंचीं और वार्डन तथा उनके पति पर दुर्व्यवहार एवं प्रताड़ना के आरोप लगाए। छात्राओं ने वार्डन के पति के छात्रावास परिसर में आने-जाने और घरेलू काम कराने जैसी शिकायतें कीं। मामले के बाद प्रशासन ने वार्डन को निलंबित किया और छात्रावास की जिम्मेदारी दूसरे अधिकारी को सौंपी।

निसरपुर स्थित माता शबरी आदिवासी कन्या छात्रावास में छात्राओं ने क्षमता से अधिक संख्या में रहने, आवासीय व्यवस्था और भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की। रिपोर्टों के अनुसार करीब 35 से 40 छात्राएं रात में छात्रावास से बाहर निकलकर कुक्षी पहुंचीं और अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं। छात्राओं के अनुसार करीब 50 की क्षमता वाले भवन में लगभग 140 छात्राएं रह रही थीं। मामले में प्रशासन ने जांच और समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया।

गंधवानी के केसवी स्थित बालिका छात्रावास की छात्राओं ने भी जर्जर भवन, मूलभूत सुविधाओं और वार्डन के व्यवहार को लेकर शिकायत की। छात्राएं कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं और नए भवन सहित व्यवस्थाओं में सुधार की मांग रखी।

जर्जर स्कूल भवनों ने बढ़ाई चिंता

टांडा प्राथमिक विद्यालय में जर्जर भवन के कारण बच्चों की पढ़ाई के लिए वैकल्पिक स्थानों का सहारा लेना पड़ा। रिपोर्टों के मुताबिक 22 बच्चे कभी मंदिर के छोटे बरामदे तो कभी स्कूल परिसर में बने शौचालय में बैठकर पढ़ते मिले। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और वैकल्पिक व्यवस्था तथा नए भवन के निर्माण को लेकर कार्रवाई की गई।

नालछा के शासकीय कन्या हाई स्कूल में भारी लोहे का गेट गिरने से कक्षा सातवीं की छात्रा घायल हो गई। उसे उपचार के लिए धार जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसके पैर में 10 से अधिक टांके लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। स्कूल प्रबंधन के अनुसार घटना गेट खोलने के प्रयास के दौरान हुई और मामले की जांच की जा रही है।

सुरक्षा और प्रबंधन पर बड़ा सवाल

इन घटनाओं में परिस्थितियां अलग-अलग हैं, लेकिन एक समान सवाल सामने आता है—क्या स्कूल और छात्रावासों में बच्चों की सुरक्षा तथा बुनियादी सुविधाओं की नियमित निगरानी हो रही है?

छात्रावासों में छात्राओं की शिकायतें, क्षमता से अधिक आवास, भवनों की स्थिति और स्कूल परिसरों में सुरक्षा से जुड़ी घटनाएं प्रशासन के लिए चुनौती बनकर सामने आई हैं। वहीं, डही मामले में कार्रवाई और अन्य मामलों में निरीक्षण/जांच से संकेत मिलता है कि शिकायतों के बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप किया है। अब निगाह इस बात पर है कि व्यवस्थाओं में स्थायी सुधार कितना प्रभावी ढंग से लागू होता है।

फिलहाल जरूरत केवल कार्रवाई की नहीं, बल्कि नियमित निरीक्षण, सुरक्षित भवन, पर्याप्त आवासीय क्षमता, गुणवत्तापूर्ण भोजन और शिकायतों के त्वरित निवारण की है, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिल सके।

संपादक- श्री कमल गिरी गोस्वामी

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